BoardExams.in
Class 7hindiCBSE 2026-27

NCERT Solutions for Class 7 hindi Chapter 4: Class 7 Hindi Chapter 4

11 Solved Questions & Exercises27 min estimated readingUpdated 2026-09-16
Top Sponsor / Ad Space

CBSE 2026-27 Board Exam Preparation & Practice Papers

Free Chapter Notes & Question Bank by BoardExams.in

NCERT Solutions • Class 7 Hindi (Malhar - मल्हार)
Chapter 4: Class 7 Hindi Chapter 4
Latest Rationalised Syllabus (NEP 2026-27)

Teachers encourage the use ofMalhar Chapter 4 पानी रे पानी कविता के प्रश्न उत्तर Question Answer for better language learning.

NCERT Class 7th Hindi Chapter 4 पानी रे पानी Question Answer

पानी रे पानी Class 7 Question Answer

कक्षा 7 हिंदी पाठ 4 प्रश्न उत्तर – Class 7 Hindi पानी रे पानी Question Answer

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

प्रश्न 1


हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?

Solution:
प्रश्न 2


निम्नलिखित में से कौन – सी बात जल चक्र से संबंधित है?

Solution:
प्रश्न 3


“इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?

Solution:

(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर:

(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं।)

मिलकर करें मिलान

• पाठ में से कुछ शब्द समूह या संदर्भ चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके अर्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए-

उत्तर:
1. – 2
2. – 3
3. – 4
4. – 1

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 1

पंक्तियों पर चर्चा

इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए।

Solution:

विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखकर इन पंक्तियों का चर्चा कर सकते हैं-

चर्चा हेतु संकेत- बिंदु-

• “पानी आता भी है तो बेवक्त।
कारण-

समाधान-

• “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”
कारण-

समाधान-

• “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है। ”
कारण-

समाधान-

• ‘अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ”
कारण-

समाधान-

सोच-विचार के लिए

लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 2

(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
उत्तर:
‘पानी रे पानी’ पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक कहा गया है क्योंकि इसमें पानी का भंडार है और यह पानी को संचित करती है। गुल्लक में पैसे जमा करने की तरह, धरती में पानी जमा होता है और इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

(ख) जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है ?
उत्तर:
जल-चक्र की प्रक्रिया एक प्राकृतिक एवं सतत प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पृथ्वी पर जल निरंतर संचरण करता रहता है। यह प्रक्रिया सूर्य की गर्मी से शुरू होती है, जब समुद्र, नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों का पानी वाष्पित होकर आकाश में चला जाता है, इसे वाष्पीकरण (Evaporation) कहा जाता है। पेड़-पौधे भी अपने पत्तों के माध्यम से जल को वाष्प के रूप में छोड़ते हैं, जिसे संवहन (Transpiration) कहते हैं।

जब जल-वाष्प ऊँचाई पर पहुँचता है, तो ठंडी हवा से मिलने पर संघनित होकर बादलों का रूप ले लेता है। इस प्रक्रिया को संघनन (Condensation) कहते हैं। बादलों में जल की मात्रा अधिक हो जाने पर वह पानी, हिम या ओलों के रूप में पृथ्वी पर वापस गिरता है, जिसे वर्षा (Precipitation) कहते हैं। यह जल पुन: नदियों, झीलों, समुद्रों और भू-जल में एकत्र होता है। इस प्रकार यह पानी फिर से वाष्पित होकर जल चक्र को जारी रखता है। यह चक्र पृथ्वी पर जल की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।

(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
उत्तर:
यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे। कुछ संभावित परिणाम निम्नलिखित हैं-

इन परिणामों को देखते हुए, जल स्रोतों का संरक्षण और प्रबंधन करना बहुत ज़रूरी है। हमें जल संचयन तथा जल संरक्षण के लिए काम करना होगा ताकि जल- ल-स्रोतों को बचाया जा सके।

(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है ?
उत्तर:
‘पानी रे पानी’ पाठ में पानी को रुपये से भी कई गुना मूल्यवान बताया गया है क्योंकि पानी जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। पानी के बिना जीवन असंभव है, जबकि रुपये की अनुपस्थिति में भी जीवन चल सकता है।

पानी की महत्ता को इस प्रकार समझा जा सकता है-

शीर्षक

(क) इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर:
पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है क्योंकि यह शीर्षक पाठ के मुख्य विषय को दर्शाता है, जो पानी की महत्ता को समझाने के लिए है।
इस शीर्षक के पीछे के कारण हो सकते है-

(इस प्रश्न के उत्तर को और गहराई से समझने के लिए सहपाठियों के साथ चर्चा भी करें।)

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 3

(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
उत्तर:
‘पानी रे पानी’ का दूसरा नाम या शीर्षक ‘पानी की महत्ता ‘ या ‘जीवन में पानी का महत्व’ दिया जा सकता है। यह शीर्षक पाठ के मुख्य विषय को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और पाठक को पाठ के उद्देश्य को समझने में मदद करता है। इस शीर्षक को देने के कारण हैं-

शब्दों की बात

बात पर बल देना

(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।
उत्तर:
हटा हुआ शब्द ‘भी’ है, जिसका अर्थ है ‘सहित’ या ‘अतिरिक्त’। ‘भी’ एक निपात है। यह शब्द को बल प्रदान करता है। अत: इसका जिस स्थान पर प्रयोग हुआ, उससे पहले वाले शब्द यानी धरती पर बल प्रदान कर रहा है। जिससे दोनों वाक्यों में प्रभावगत अंतर देखने को मिल रहा है।

(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तर:

(इसी तरह के अन्य वाक्य पाठ में ढूँढ़कर लिखने का प्रयास विद्यार्थी स्वयं करें।)

समानार्थी शब्द

• नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। इस कार्य के लिए आप बादल में से शब्द चुन सकते हैं।

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 4

(क)सूरजकी किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।
(ख) समुद्र का पानीभापबनकर ऊपर जाता है।
(ग) अचानकबादलगरजने लगा।
(घ) जल-चक्र मेंहवाकी भी बहुत बड़ी भूमिका है।
उत्तर:
(क) सूर्य, भास्कर, दिवाकर, दिनकर
(ख) वाष्प, नीर
(ग) मेघ, जलद, वारिद समीर
(घ) वायु, पवन,

उपसर्ग

(उपसर्ग को समझने के लिए विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 48 देखें।)

“देश के कई हिस्सों में तोअकालजैसे हालात बन जाते हैं।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है— समय, मृत्यु। जबकि अकाल का अर्थ है— कुसमय, सूखा। कुछ शब्दांश किसी शब्द के आंरभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इस तरह के शब्दांश ‘उपसर्ग’ कहलाते हैं।
आइए, कुछ और उपसर्गों की पहचान करते हैं—

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 5


• अब आप भी उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

उत्तर:

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 6

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 7

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं, अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
उत्तर:
धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए हम निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं:

(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

(ग) अपने द्वारा बनाए गए जल चक्र के चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

सृजन

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 8

(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया। आपको विद्यालय जाना है। आपके घर के समीप ही एक सार्वजनिक नल है। आप बालटी आदि लेकर वहाँ पहुँचते हैं और ठीक उसी समय आपके पड़ोसी भी पानी लेने पहुँच जाते हैं। आप दोनों ही अपनी-अपनी बालटी पहले भरना चाहते हैं। ऐसी परिस्थिति में आपस में किसी प्रकार का विवाद (तू-तू-मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
उत्तर:

(ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें और फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनारे बरसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर। ”
इस वाक्य को पढ़कर आपके सामने कोई एक चित्र उभय आया होगा, उस चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं चित्र बनाकर उसमें रंग भरें।

पानी रे पानी

नीचे हम सबकी दिनचर्या से जुड़ी कुछ गतिविधियों के चित्र हैं। उन चित्रों पर बातचीत कीजिए जो धर पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और उन चित्रों पर भी बात करें जो पानी की गुल्लक को जल्दी ही खाली कर रहे हैं।

• (प्रश्न पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 50 पर देखें।)
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 9

सबका पानी

• ‘सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले’ इस विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन करें। परिचर्चा के मुख्य बिंदुओं को आधार बनाते हुए रिपोर्ट तैयार करें।
उत्तर:
विषय : सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले
स्थान : सर्वोदय विद्यालय, सभा कक्ष
तिथि : 23 अप्रैल, 20xx
परिचय : पानी मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और जल संसाधनों का असंतुलित दोहन इसे संकट में डाल रहा है। इसी समस्या की गंभीरता को समझने के लिए हमारे विद्यालय में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।

परिचर्चा के मुख्य बिंदु:

निष्कर्ष : परिचर्चा में सभी छात्रों और अध्यापकों ने यह माना कि यदि हम जल के महत्व को समझें और जागरूक हों, तो हर व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त जल मिल सकता है। इसके लिए सरकार, समाज और हर नागरिक को मिलकर प्रयास करना होगा।
सुझाव :

रिपोर्ट प्रस्तुतकर्ता-
संतोष शर्मा
सर्वोदय विद्यालय
23 अप्रैल, 20xx

दैनिक कार्यों में पानी

(क) क्या आपने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि आपके घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है? अपने घर में पानी के उपयोग से जुड़ी एक तालिका बनाइए। इस तालिका के आधार पर पता लगाइए-

(ख) क्या आपको अपनी आवश्यकतानुसार पानी उपलब्ध हो जाता है? यदि हाँ, तो कैसे? यदि नहीं, तो क्यों?
(ग) आपके घर में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पानी का संचयन कैसे और किन पात्रों में किया जाता है?

• (प्रश्न पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ संख्या – 51 पर देखें।)
उत्तर:
विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन के अनुभव के आधार पर स्वयं करें।

जन सुविधा के रूप में जल

नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए —

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 10

इन चित्रों के आधार पर जल आपूर्ति की स्थिति के बारे में अपने साथियों से चर्चा कीजिए और उसका विवरण लिखिए |

• (प्रश्न पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ संख्या – 51 पर देखें।)
उत्तर:
विद्यार्थी जल आपूर्ति की स्थिति के बारे में अपने साथियों से चर्चा करके उसका विवरण स्वयं लिखें।

बिना पानी सब सून

(क) पाठ में भूजल स्तर के कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं, जैसे- तालाबों में कचरा फेंककर भरना आदि। भूजल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते हैं? पता लगाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
(इसके लिए आप अपने सहपाठियों, शिक्षकों और घर के सदस्यों की सहायता भी ले सकते हैं।)
उत्तर:
तालाबों में कचरा भरने के अलावा और भी कारण हैं, जैसे-

(ख) भूजल स्तर की कमी से हमें आजकल किन कठिनाइयों का समाना करना पड़ता है?
उत्तर:
भूजल स्तर की कमी से होने वाली कठिनाइयाँ-

(ग) आपके विद्यालय, गाँव या शहर के स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे है, पता लगाकर लिखिए।
उत्तर:
स्थानीय प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास –

यह भी जानें

वर्षा जल संग्रहण

वर्षा के जल को एकत्र करना और उसका भंडारण करके बाद में प्रयोग करना जल की उपलब्धता में वृद्धि करने का एक उपाय है। इस उपाय द्वारा वर्षा का जल एकत्र करने को ‘वर्षा जल संग्रहण’ कहते हैं। वर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य यही है कि “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।” वर्षा जल संग्रहण की एक तकनीक इस प्रकार है—

छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण

इस प्रणाली में भवनों की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाया जाता है। इस जल में छत पर उपस्थित मिट्टी के कण मिल जाते हैं। अत: इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।

(‘वर्षा-जल संग्रहण’ से संबंधित अंश पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या- 52 पर देखें।)

• अपने घर या विद्यालय के आस-पास, मुहल्ले या गाँव में पता लगाइए कि वर्षा जल संग्रहण की कोई विधि अपनाई जा रही है या नहीं? यदि हाँ, तो कौन-सी विधि है? उसके विषय में लिखिए। यदि नहीं, तो अपने शिक्षक या परिजनों की सहायता से इस विषय में समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में
संपादक,
दैनिक भास्कर,
दिल्ली

विषय- वर्षा जल संचयन पर ध्यान आकर्षित करने के संबंध में।

महोदय/ महोदया,

सविनय निवेदन है कि हमारे क्षेत्र चंदन विहार में वर्षा जल संचयन की कोई विधि अपनाई नहीं जा रही है। वर्षा का पानी पूरी तरह से बहकर नालों में चला जाता है, जिससे जल संकट का सामना करना पड़ता है। हम जानते हैं कि वर्षा जल संचयन हमारे जल संसाधनों को बचाने का एक प्रभावी तरीका है।

आपसे अनुरोध है कि आप हमारे क्षेत्र में वर्षा जल संचयन के महत्व को उजगार करते हुए इस विषय पर लोगों को जागरूक करें। यदि प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं, तो कृपया इस पर ध्यान दें और हमारे क्षेत्र में जल संचयन की विधियाँ अपनाने के लिए पहल करें।

हम मानते हैं कि यदि इस दिशा में कार्य किया जाता है, तो आने वाले समय में जल की समस्या से निजात मिल सकती है और पर्यावरण को भी लाभ होगा।

सहायता और इस विषय पर ध्यान देने के लिए हम आपके आभारी होंगे।

धन्यवाद।

भवदीय
क० ख०ग०

आज की पहेली

• जल के प्राकृतिक स्रोत हैं- वर्षा, नदी, झील और तालाब। दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी शब्द ढूँढ़िए और लिखिए।

उत्तर:

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 11

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 12

खोजबीन के लिए

• पानी से संबंधित गीत या कविताओं का संकलन कीजिए और इनमें से कुछ को अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए | इसके लिए आप अपने परिजनों एवं शिक्षक अथवा पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

झरोखे से

आपने तालाबों और नदियों से रिसकर धरती रूपी गुल्लक में जमा होने वाले पानी के संबंध में यह रोचक लेख पढ़ा। अब आप तालाबों के बनने के इतिहास के विषय में अनुपम मिश्र के एक लेख ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ का अंश पढ़िए।

पाल के किनारे रखा इतिहास

“अच्छे-अच्छे काम करते जाना”, राजा ने कूड़न किसान से कहा था।

कूड़न, बुढ़ान, सरमन और कौंराई थे चार भाई। चारों सुबह जल्दी उठकर अपने खेत पर काम करने जाते। दोपहर को कूड़न की बेटी आती, पोटली में खाना लेकर।

एक दिन घर से खेत जाते समय बेटी को एक नुकीले पत्थर से ठोकर लग गई। उसे बहुत गुस्सा आया। उसने अपनी दराँती से उस पत्थर को उखाड़ने की कोशिश की। पर लो, उसकी दराँती तो पत्थर पर पड़ते ही लोहे से सोने में बदल गई। और फिर बदलती जाती हैं इस लम्बे किस्से की घटनाएँ बड़ी तेजी से। पत्थर उठाकर लड़की भागी-भागी खेत पर आती है। अपने पिता और चाचाओं को सब कुछ एक साँस में बता देती है। चारों भाइयों की साँस भी अटक जाती है। जल्दी-जल्दी सब घर लौटते हैं। उन्हें मालूम पड़ चुका है कि उनके हाथ में कोई साधारण पत्थर नहीं है, पारस है। वे लोहे की जिस चीज को छूते हैं, वह सोना बनकर उनकी आँखों में चमक भर देती है।

पर आँखों की यह चमक ज्यादा देर तक नहीं टिक पाती। कूड़न को लगता है कि देर-सबेर राजा तक यह बात पहुँच ही जाएगी और तब पारस छिन जाएगा। तो क्या यह ज्यादा अच्छा नहीं होगा कि वे खुद जाकर राजा को सब कुछ बता दे।

किस्सा आगे बढ़ता है। फिर जो कुछ घटता है, वह लोहे को नहीं बल्कि समाज को पारस से छुआने का किस्सा बन जाता है।
राजा न पारस लेता है, न सोना। सब कुछ कूड़न को वापस देते हुए कहता है, “जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।”

यह कहानी सच्ची है, ऐतिहासिक है— नहीं मालूम। पर देश के मध्य भाग में एक बहुत बड़े हिस्से में यह इतिहास को अँगूठा दिखाती हुई लोगों के मन में रमी हुई है। यहीं के पाटन नामक क्षेत्र में चार बहुत बड़े तालाब

पर आँखों की यह चमक ज्यादा देर तक नहीं टिक पाती। कूड़न को लगता है कि देर-सबेर राजा तक यह बात पहुँच ही जाएगी और तब पारस छिन जाएगा। तो क्या यह ज्यादा अच्छा नहीं होगा कि वे खुद जाकर राजा को सब कुछ बता दे।

किस्सा आगे बढ़ता है। फिर जो कुछ घटता है, वह लोहे को नहीं बल्कि समाज को पारस से छुआने का किस्सा बन जाता है।

राजा न पारस लेता है, न सोना। सब कुछ कूड़न को वापस देते हुए कहता है, “जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।”

यह कहानी सच्ची है, ऐतिहासिक है— नहीं मालूम। पर देश के मध्य भाग में एक बहुत बड़े हिस्से में यह इतिहास को अँगूठा दिखाती हुई लोगों के मन में रमी हुई है। यहीं के पाटन नामक क्षेत्र में चार बहुत बड़े तालाब आज भी मिलते हैं और इस कहानी को इतिहास की कसौटी पर कसने वालों को लजाते हैं— चारों तालाब इन्हीं चारों भाइयों के नाम पर हैं। बूढ़ा सागर है, मझगवाँ में सरमन सागर है, कुआँग्राम में कौंराई सागर है तथा कुंडम गांव में कुंडम सागर। सन 1907 में गजेटियर के माध्यम से इस देश का इतिहास लिखने के लिए घूम रहे एक अंग्रेज ने भी इस इलाके में कई लोगों से यह किस्सा सुना था और फिर देखा-परखा था इन चार बड़े तालाबों को।

तब भी सरमन सागर इतना बड़ा था कि उसके किनारे पर तीन बड़े-बड़े गाँव बसे थे और तीनों गाँव इस तालाब को अपने-अपने नामों से बाँट लेते थे। पर वह विशाल ताल तीनों गाँवों को जोड़ता था और सरमन सागर की तरह स्मरण किया जाता था। इतिहास ने सरमन, बुढ़ान, कौंराई और कूड़न को याद नहीं रखा लेकिन इन लोगों ने तालाब बनाए और इतिहास को उनके किनारे पर रख दिया था।

देश के मध्य भाग में, ठीक हृदय में धड़काने वाला यह किस्सा उत्तर – दक्षिण, पूरब-पश्चिम – चारों तरफ किसी न किसी रूप में फैला हुआ मिल सकता है और इसी के साथ मिलते हैं सैंकड़ों, हजारों तालाब | इनकी कोई ठीक गिनती नहीं है। इन अनगिनत तालाबों को गिनने वाले नहीं, इन्हें तो बनाने वाले लोग आते रहे और तालाब बनते रहे।

Class 7 Hindi Chapter 4 Diagram 13

किसी तालाब को राजा ने बनाया तो किसी को रानी ने, किसी को किसी साधारण गृहस्थ ने तो किसी को किसी असाधारण साधु-संत ने – जिस किसी ने भी तालाब बनाया, वह महाराज या महात्मा ही कहलाया। एक कृतज्ञ समाज तालाब बनाने वालों को अमर बनाता था और लोग भी तालाब बनाकर समाज के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते थे।

• (इससे संबंधित अंश पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या-53-54 पर देखें।)
उत्तर:
विद्यार्थी ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ स्वयं पढ़ें।

साझी समझ

• ‘पानी रे पानी’ और ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ में आपको कौन-कौन सी बातें समान लगीं? उनके विषय में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
‘पानी – रे – पानी’ और ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ में समान बातें निम्नलिखित हैं-

(सहपाठियों के साथ चर्चा करके और विस्तार से समझें।)

कविता से
प्रश्न 1.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
उत्तर-
कठपुतली को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि उसे सदैव दूसरों के इशारों पर नाचना पड़ता है और वह लंबे अर्से से धागे में बँधी है। वह अपने पाँवों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर बनना चाहती है। धागे में बँधना उसे पराधीनता लगता है, इसीलिए उसे गुस्सा आता है।

प्रश्न 2


कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?[Imp.]
उत्तर
कठपुतली स्वतंत्र होकर अपने पाँवों पर खड़ी होना चाहती है लेकिन खड़ी नहीं होती क्योंकि जब उस पर सभी कठपुतलियों की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आती है तो वह डर जाती है। उसे ऐसा लगता है कि कहीं उसका उठाया गया कदम सबको मुश्किल में न डाल दे।

प्रश्न 3


पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगीं?
उत्तर-
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को बहुत अच्छी लगी, क्योंकि वे भी स्वतंत्र होना चाहती थीं और अपनी पाँव। पर खड़ी होना चाहती थी। अपने मनमर्जी के अनुसार चलना चाहती थीं। पराधीन रहना किसी को पसंद नहीं। यही कारण था कि वह पहली कठपुतली की बात से सहमत थी।

प्रश्न 4


पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि-‘ये धागे / क्यों हैं मेरे पीछे-आगे? / इन्हें तोड़ दो; / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।’ -तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि-‘ये कैसी इच्छा / मेरे मन में जगी ?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए

Solution:

पहली कठपुतली गुलामी का जीवन जीते-जीते दुखी हो गई थी। धागों में बँधी कठपुतलियाँ दूसरों के इशारे पर नाचना ही अपना जीवन मानती हैं लेकिन एक बार एक कठपुतली ने विद्रोह कर दिया। उसके मन में शीघ्र ही स्वतंत्र होने की लालसा जाग्रत हुई, अतः उसने आजादी के लिए अपनी इच्छा जताई, लेकिन सारी कठपुतलियाँ उसके हाँ में हाँ मिलाने लगी और उनके नेतृत्व में विद्रोह के लिए तैयार होने लगी, लेकिन जब उसे अपने ऊपर दूसरी कठपुतलियों की जिम्मेदारी का अहसास हुआ तो वह डर गई, उसे ऐसा लगने लगा न जाने स्वतंत्रता का जीवन भी कैसा होगा? यही कारण था कि पहली कठपुतली चिंतित होकर अपने फैसले के विषय में सोचने लगी।

कविता से आगे

प्रश्न 1


‘बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।’-इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? नीचे दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-
(क)बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
उत्तर
बहुत दिन हुए हमें अपने मन के छंद छुए’ इसका यह अर्थ है कि बहुत दिन हो गए मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई अर्थात् कठपुतलियाँ परतंत्रता से अत्यधिक दुखी हैं। उन्हें ऐसा लगता है जैसे वे अपने मन की चाह को जान ही नहीं पातीं। पहली कठपुतली के कहने से उनके मन में आजादी की उमंग जागी।

प्रश्न 2


नीचे दो स्वतंत्रता आंदोलनों के वर्ष दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखिए
(क) सन् 1857 ____ ____
(ख) सन् 1942 ____ ____
उत्तर-
(क) 1857 – 1. महारानी लक्ष्मीबाई, 2. मंगल पांडे
(ख) 1942 – 1. महात्मा गांधी, 2. जवाहर लाल नेहरू

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1


स्वतंत्र होने की लड़ाई कठपुतलियाँ कैसे लड़ी होंगी और स्वतंत्र होने के बाद स्वावलंबी होने के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए होंगे? यदि उन्हें फिर से धागे में बाँधकर नचाने के प्रयास हुए होंगे तब उन्होंने अपनी रक्षा किस तरह के उपायों से की होगी?
उत्तर-
स्वतंत्र होने के लिए कठपुतलियाँ लड़ाई आपस में मिलकर लड़ी होंगी, क्योंकि सबकी परेशानी एक जैसी थी और सबको एक जैसे धागों से स्वतंत्रता चाहिए थी। पहले सभी कठपुतलियों से विचार-विमर्श किया होगा। स्वतंत्र होने के बाद स्वावलंबी बनने के लिए उन्होंने काफ़ी संघर्ष किया होगा। अपने पाँव पर खड़े होने के लिए बहुत परिश्रम किया होगा। रहने, खाने, पीने, जीवन-यापन की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दिन-रात एक किया होगा।

यदि फिर भी उन्हें धागे में बाँधकर नचाने का प्रयास किया गया होगा तो उन्होंने एकजुट होकर इसका विरोध किया होगा क्योंकि गुलामी में सारे सुख होने के बावजूद आजाद रहना ही सबको अच्छा लगता है। उन्होंने सामूहिक प्रयास से ही शत्रुओं की हर चाल को नाकाम किया होगा। इस तरह उन्होंने अपनी आजादी कायम रखी होगी।

भाषा की बात

प्रश्न 1


कई बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवर्तन हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवर्तन हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गई। इस प्रकार के कुछ शब्द बनाइए जैसे-काठ (कठ) से बना-कठगुलाब, कठफोड़ा
उत्तर-

प्रश्न 2


कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे-आगे-पीछे अधिक प्रचलिते शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में ‘पीछे-आगे’ का प्रयोग हुआ है। यहाँ ‘आगे’ का ‘…बोली ये धागे’ से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए-दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
उत्तर-
पतला-दुबला, इधर-उधर, नीचे-ऊपर, काला-गोरा, बाएँ-दाएँ, उधर-इधर आदि

अन्य पाठेतर हल प्रश्न

बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
(क) कठपुतली कविता के रचयिता हैं
(i) मैथलीशरण गुप्त
(ii) भवानी प्रसाद मिश्र
(iii) सुमित्रानंदन पंत
(iv) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) कठपुतली को किस बात का दुख था?
(i) हरदम हँसने का
(ii) दूसरों के इशारे पर नाचने का
(iii) हरदम खेलने का
(iv) हरदम धागा खींचने का।

(ग) कठपुतली के मन में कौन-सी इच्छा जागी?
(i) मस्ती करने की
(ii) खेलने की
(iii) आज़ाद होने की
(iv) नाचने की

(घ) पहली कठपुतली ने दूसरी कठपुतली से क्या कहा?
(i) स्वतंत्र होने के लिए।
(ii) अपने पैरों पर खड़े होने के लिए।
(iii) बंधन से मुक्त होने के लिए 106
(iv) उपर्युक्त सभी

(ङ) कठपुतलियों को किनसे परेशानी थी?
(i) गुस्से से
(ii) पाँवों से
(iii) धागों से
(iv) उपर्युक्त सभी से

(च) कठपुतली ने अपनी इच्छा प्रकट की|
(i) हर्षपूर्वक
(ii) विनम्रतापूर्वक
(iii) क्रोधपूर्वक
(iv) व्यथापूर्वक

(छ) कठपुतली गुस्से से क्यों उबल पड़ी
(i) वह आजाद होना चाहती थी
(ii) वह खेलना चाहती थी
(iii) वह पराधीनता से परेशान थी
(iv) उपर्युक्त सभी

(ज) “पाँवों को छोड़ देने का’ को अर्थ है
(i) सहारा देना
(ii) स्वतंत्र कर देना
(iii) आश्रयहीन कर देना
(iv) पैरों से सहारा हटा देना

Solution:

(क) (ii)
(ख) (ii)
(ग) (iii)
(घ) (iv)
(ङ) (iii)
(च) (iii)
(छ) (iii)
(ज) (ii)

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

(क) कठपुतली को धागे में क्यों बाँधा जाता है?
उत्तर-
कठपुतली को धागे में इसलिए बाँधा जाता है जाकि उसे अपनी उँगलियों के इशारों पर नचाया जा सकें।

(ख) कठपुतलियाँ किसका प्रतीक हैं?
उत्तर-
कठपुतलियाँ ‘आम आदमी’ का प्रतीक हैं ताकि वे अपनी मर्जी का जीवन जी सके।

(ग) ‘कठपुतली’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर-
‘कठपुतली’ कविता के माध्यम से कवि संदेश देना चाहता है कि आजादी का हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। पराधीनता व्यक्ति को व्यथित कर देता है। अतः स्वतंत्र होना और उसे बनाए रखना बहुत जरूरी है, भले ही यह कठिन क्यों न हो।

लघु उत्तरीय प्रश्न

(क) कठपुतली को गुस्सा क्यों आता है?
उत्तर-
कठपुतली को गुस्सा इसलिए आता हैं क्योंकि उसे चारों ओर से धागों से बंधन में बाँध कर रखा गया था। वह इसे बंधन से तंग आ गई थी। वह आज़ाद होना चाहती थी। वह अपनी इच्छानुसार जीना चाहती थी।

(ख) पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी?
उत्तर-
अवश्य पहली, कठपुतली की बात सुनकर दूसरी कठपुतलियों को अच्छी लगी होगी। परतंत्र रहना किसी को पसंद नहीं। सभी स्वतंत्र यानी आजाद रहना चाहते हैं। सभी अपने-अपने मर्जी से काम करना चाहते हैं। किसी भी कठपुतली को धागे में बंधे रहना और दूसरों की मर्जी से नाचना पसंद नहीं था। यही कारण था कि पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को अच्छी लगी होगी।

(ग) आपके विचार से किस कठपुतली ने विद्रोह किया?
उत्तर-
हमारे विचार से स्वतंत्रता के लिए सबसे छोटी कठपुतली ने विरोध किया होगा क्योंकि नई पीढ़ी ही सदैव बदलाव के लिए प्रयास करती है। इसी भावना से प्रेरित होकर उसने अपने बंधनों को तोड़कर स्वावलंबी बनने का प्रयास किया होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

(क) इस कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर-
इस कविता के माध्यम से कवि ने आजादी के महत्त्व को बतलाने का प्रयास किया है। इसमें कवि ने बताने का प्रयास किया है कि आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों का अहसास हमें होना चाहिए। स्वतंत्र होना सभी को अच्छा लगता है लेकिन स्वतंत्रता का सही उपयोग कम ही लोग कर पाते हैं। इतना ही नहीं आज़ाद होने पर व्यक्ति को आत्मनिर्भर होना पड़ता है। आज़ादी पाने के बाद हमें अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दूसरों पर आश्रित नहीं रहा जा सकता। अतः आजादी के बाद आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त अपनी आज़ादी को बनाए रखने के लिए कोशिश करते रहना पड़ता है।

मूल्यपरक प्रश्न

(क) क्या आपको दूसरों के इशारों पर काम करना अच्छा लगता है? इसका तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
उत्तर-
कदापि नहीं, हमें दूसरों के इशारों पर पलना बिलकुल पसंद नहीं है। इससे हमारी आज़ादी का हनन होता है, साथ ही प्रत्येक स्वाभिमानी व्यक्तियों के विचारों के विपरीत है। अतः स्वाभिमानी व्यक्ति अपनी शर्तों पर स्वच्छंद जीना पसंद करते हैं। अतः हमें दूसरों के इशारों पर काम करना अच्छा नहीं लगता है।

In-Article Ad Slot

CBSE 2026-27 Board Exam Preparation & Practice Papers

Free Chapter Notes & Question Bank by BoardExams.in