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NCERT Solutions for Class 8 hindi Chapter 10: अकबरी लोटा (Akbari_Lota)

15 Solved Questions & Exercises24 min estimated readingUpdated 2026-09-16
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NCERT Class 8 Hindi (Vasant Bhag 3) Solutions
Chapter 10: अकबरी लोटा (Akbari_Lota)

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NCERT Class 8th Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न Question Answer

तरुण के स्वप्न Class 8 Question Answer

कक्षा 8 हिंदी पाठ 10 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi तरुण के स्वप्न Question Answer

पाठ से प्रश्न- अभ्यास
(पृष्ठ 142-146)

आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से चर्चा करें। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

प्रश्न 1


“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) सुभाषचंद्र बोस के लिए
(ख) देश के तरुण वर्ग के लिए
(ग) चित्तरंजन दास के लिए
(घ) भारतवासियों के लिए
उत्तर:
(ख) देश के तरुण वर्ग के लिए

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 1

प्रश्न 2


स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा—
(क) आर्थिक असमानता से
(ख) स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से
(ग) श्रम और कर्म की मर्यादा से
(घ) जातिभेद से
उत्तर:
(ग) श्रम और कर्म की मर्यादा से

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 2

प्रश्न 3


“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
(क) हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
(ख) हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
(ग) उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
(घ) उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है।
उत्तर:
(ग) उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है

प्रश्न 4


जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब-
(क) राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
(ख) तरुणों का साहस बढ़ेगा
(ग) राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
(घ) राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
उत्तरः
(ख) तरुणों का साहस बढ़ेगा

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

मिलकर करें मिलान

नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव – विचार से सही मिलान कीजिए।

उत्तर:
1. 2
2. 3
3. 1

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 3

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।

(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”
(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”
उत्तर:
(क) सुभाषचंद्र बोस ने एक ऐसा स्वाधीन संपन्न समाज और राष्ट्र का स्वप्न देखा जिसमें प्रत्येक जन को समान अधिकार मिले। जहाँ हर व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उचित अवसर व संसाधन उपलब्ध हों। आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर देश बनाना चाहिए। स्वतंत्रता और राष्ट्र की उन्नति के लिए आर्थिक और सामाजिक समानता आवश्यक हैं।

(ख) नेताजी ने अपनी मातृभूमि को साम्राज्यवादी ब्रिटिश शासन के बंधन से मुक्त कराने हेतु स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न और आदर्श विचारधारा को अपनाने के लिए युवा वर्ग को प्रेरित किया। नेताजी के राजनीतिक गुरु देशबंधु चित्तरंजन दास महान विचारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनसे प्रेरणा लेते हुए नेताजी ने देश में आजादी की लड़ाई को दिशा दी। देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वप्न शक्ति का स्रोत और आनंद का आधार बना।

(ग) ‘उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो’, इस कथन का अर्थ है कि समाज में समानता हो। सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक स्तर पर हर भारतीय अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो। भारतवर्ष की आज़ादी और उन्नति में समाज समान रूप से भागीदार बने। जातिभेद समाप्त हो और नारी सशक्तिकरण हो।

सोच-विचार के लिए

अब आप इस पाठ को पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-

(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था ?
उत्तर:
नेताजी ने सुखी, समृद्ध, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था। ऐसा भारत जिसमें सामाजिक समानता हो, स्वदेशी उद्योग मजबूत हो और सभी दृष्टियों से मुक्त समाज राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे।

(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा ?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में एक प्रमुख नेता थे। उन्होंने अपने विचारों और आदर्शों से देश के युवाओं को नई दिशा दी। अंग्रेजों से देश को स्वतंत्र कराना उनके जीवन का लक्ष्य था। राष्ट्र के निर्माण में श्रम, त्याग और बलिदान को जीवन की सार्थकता के रूप में देखा।

(ग) “ आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ने ऐसे स्वाधीन संपन्न समाज और राष्ट्र का सपना देखा था जिसमें हर व्यक्ति राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बने। वे देश के युवाओं में देश के लिए प्रेम, मेहनत, त्याग और समर्पण की भावना कूट-कूटकर भरना चाहते थे। देश की उन्नति के लिए श्रम और कर्म का महत्व हो जिसमें आलसी, भ्रष्टाचारी और अकर्मण्य लोगों के लिए स्थान नहीं होना चाहिए।

(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या – क्या कर सकती है?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस के जीवन से प्रेरणा लेकर आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता, समानता और राष्ट्रभक्ति के सच्चे मूल्यों को अपनाना चाहिए। उनके व्यक्तित्व और विचारों से प्रेरणा लेकर आज युवाओं को समाज और देश के उत्थान के लिए अग्रसर होना चाहिए। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” के नारे से प्रत्येक भारतीय के दिल से देशभक्ति की भावना जाग्रत होती है। युवाओं को व्यक्तिगत स्वार्थों को त्यागकर राष्ट्र को अपना पूरा जीवन समर्पित करना, समाज के उत्थान और राष्ट्र की स्वाधीनता को सर्वोपरि रखने के कार्य करने का प्रयास करना चाहिए।

अनुमान और कल्पना से

(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ने सपना देखा था, एक ऐसे राष्ट्र का जहाँ समान अवसरों और संसाधनों का वितरण हो। उनका लक्ष्य सामाजिक, आर्थिक असमानताओं को खत्म करना था। उन्होंने अपने स्वतंत्रता प्राप्ति और समृद्ध समाज के लक्ष्य में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्व दिया। सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्य और स्वदेशी आधार पर राष्ट्र निर्माण करने का प्रयास किया। उस समाज में आलसी, अकर्मण्य और भ्रष्टाचारी लोगों से मुक्ति की कामना थी।

(ख) “उस समय में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
उत्तर:
स्वतंत्र भारत में सुभाषचंद्र बोस एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते थे जिसमें सभी को समान आर्थिक लाभ और सामाजिक समानता मिले। जन्म, लिंग, जाति के आधार पर बँटवारा न हो। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं किया। उन्होंने महिलाओं के सामाजिक बंधन को तोड़ने का समर्थन किया। राष्ट्र के विकास के लिए महिलाओं की स्थिति को ऊपर उठाना और बेहतर बनाना आवश्यक है।

(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन – कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर:
प्रगतिशील भारत के लिए समानता, शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के मार्ग पर चलना है। आदिवासियों, किसानों, दलितों और श्रमिकों के विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।

(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं- “हे मेरे तरुण भाइयो। ” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
उत्तर:
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने युवाओं को शक्ति, साहस और वीरता के प्रतीक के रूप में देखा था। युवा देश का आधार बनते हैं। अंग्रेजों से लड़ने के लिए उन्होंने आज़ाद हिंद फौज का गठन किया। हजारों युवा सैनिकों ने राष्ट्र की रक्षा का, महिलाओं की समान भागीदारी देने का संकल्प लिया और अंग्रेजों को देश से निकल जाने के लिए बाध्य किया। युवा पीढ़ी जब एकजुट होकर आगे बढ़ती है तो समाज और राष्ट्र का उत्थान होता है। शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, संचार, राजनीति, अंतरिक्ष, सेना, कृषि, उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की सेवाएँ अनिवार्य होती हैं और युवा शक्ति से राष्ट्र का विकास संभव होता है।

(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ- स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ने युवाओं में अपने उद्बोधनों के द्वारा शक्ति, हिम्मत और देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की भावना का संचार किया। उन्होंने देश की आजादी का स्वप्न दिखाया और उसे पूर्ण करने का पथ दिखाया। उनके आह्वान पर लाखों युवाओं ने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने और देश के लिए मर मिटने की भावना को जाग्रत किया और दृढ़ संकल्प की प्रतिक्रिया दी होगी।

शीर्षक

(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर:
स्वतंत्र और विकसित राष्ट्र देश के युवाओं का सपना होता है। देश के हर नौजवान सपना देखते हैं कि वे राष्ट्र की उन्नति में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें। सामाजिक और आर्थिक स्तर पर सबके साथ मिलकर तरक्की करें। इससे नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण को ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है।

(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक – ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की शक्ति’ यह शीर्षक इसलिए चुना गया है क्योंकि देश का भविष्य और प्रगति युवा पीढ़ी पर होती है। उनकी प्रतिभा और शक्ति से राष्ट्र को मजबूती मिलती है। युवा अपने विचारों और ऊर्जा से समाज व देश को नई दिशा प्रदान करता है।

(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
उत्तर:
कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिलने पर मैं भारत को विकसित देश बनाने के लिए क्या करना चाहिए’ विषय का चुनाव करूँगी। मेरे उद्बोधन का शीर्षक होगा- ‘ भारत: एक विकसित राष्ट्र”, इस संबोधन में मैं कृषि, सेना, देश की सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास और समान न्याय व्यवस्था के विषयों को प्रमुखता से शामिल करना चाहूँगी।

भाषा की बात

(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए-

उत्तर:

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 4

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 5

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
उत्तर:

भारत देश को विकसित बनने के लिए उन्नत समाज और उज्ज्वल जीवन का आधार चाहिए। देश की युवा शक्ति शाश्वत मूल्यों को अपनाकर इस लक्ष्य को प्राप्त करे। भारत को सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को पूर्ण करने में हमारा सच्चा आनंद निहित है।

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 6

विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 7

(क) “और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए –

उत्तर:

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 8

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 9

(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे- “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।
उत्तर:

  1. मैंने उसकी सहायता करने का प्रस्ताव स्वीकार किया परंतु उसका व्यवहार मुझे अस्वीकार्य लगा।
  2. हमें सार्थक जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए, निरर्थक बातों में समय बर्बाद न करें।
  3. समाज में जब तक आर्थिक विषमता रहेगी, तब तक समानता की स्थापना चुनौतिपूर्ण है।
  4. स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने क्षुद्र जीवन में ही विशाल / महान लक्ष्यों को प्राप्त करने का संघर्ष किया।
  5. समाज में संपन्न और विपन्न का भेद-भाव समाप्त होना चाहिए।
  6. अकर्मण्य लोगों को कर्मठ बनने की प्रेरणा देनी आवश्यक है।
  7. देश की रक्षा के लिए मरण स्वीकार करना ही सार्थक जीवन की पहचान है।

पाठ से आगे प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 146-150)

आपकी बात

(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
उत्तर:
एक छात्रा के रूप में मैं चाहती हूँ कि यह दुनिया सबके लिए बेहतर बने। मेरे भी कुछ सपने हैं अपने विद्यालय, राज्य और प्यारे देश भारत को लेकर।

  • विद्यालय में शिक्षा पूर्ण विकास पर आधारित हो। हर बच्चा स्कूल आकर शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम हो। छात्रों के आर्थिक और सामाजिक स्तर को लेकर भेद-भाव न हो। स्कूल में लाइब्रेरी, लैब और डिजिटल ढाँचे हों, ताकि बच्चे अच्छा सीख सकें। कौशल शिक्षा का अवसर मिले और स्कूल जाना बोझ न लगे।
  • राज्य में शिक्षा का प्रचार-प्रसार उच्च स्तर पर हो। शहर हो या गाँव, हर क्षेत्र में अच्छी शिक्षा से जुड़ी सुविधाएँ मिले। बाल-श्रम से मुक्ति मिले। महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सुधार कार्य हो।
  • मेरा देश भारत पूरी दुनिया में आदर्श राष्ट्र के रूप में जाना जाए। सेना का सम्मान हो और हर नागरिक राष्ट्रहित में अपने कर्तव्यों का पालन करे। नागरिक अधिकारों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जातिभेद और ऊँच-नीच का अंतर समाप्त हो जाए। मेरा मानना है कि सभी नागरिक राष्ट्र के उत्थान में योगदान दें और विकसित भारत का लक्ष्य पूर्ण करने की दिशा में अग्रसर हों।

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 10

(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
देश की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। हमें जागरूक, सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए। राष्ट्रप्रेम की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सम्मान देना चाहिए। अपने देश की सांस्कृतिक धरोहर और विरासत पर गर्व करना चाहिए। देश के संविधान को अच्छी तरह समझना चाहिए। राष्ट्रीय पर्वों में भाग लें और इनके महत्त्व को समझें। हम अच्छी शिक्षा प्राप्त करें क्योंकि शिक्षित और जागरूक नागरिक बनकर, राष्ट्र की उन्नति में योगदान दे सकते हैं। विज्ञान, तकनीक, स्टार्टअप या अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में भाग लेकर देश का भविष्य उज्ज्वल करें।

मिलान कीजिए

(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:
1. 6
2. 4
3. 5
4. 2
5. 1
6. 3

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 11

(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आए स्वतंत्रता सेनानी का नाम देशबंधु चित्तरंजन दास है।
सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।
उत्तर:
छात्रगण यह गतिविधी अध्यापकों की सहायता से पूर्ण करेंगे।

स्त्री सशक्तीकरण

(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर:
स्त्रियों को विशेषाधिकार उनके हितों की रक्षा के लिए दिए गए हैं। विशेष अधिकारों का उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए प्रदान किए गए हैं।

  1. संवैधानिक अधिकार-

    समानता का अधिकार
    लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध
    रोजगार में समान अवसर
  2. कानूनी अधिकार-

    दहेज निषेध अधिनियम
    बाल विवाह निषेध
    घरेलू हिंसा से संरक्षण
  3. विशेष योजनाएँ-

    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
    सुकन्या समृद्धि योजना
    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आज़ाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ने ‘आज़ाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उन्होंने एक महिला रेजिमेंट भी बनाई जिसे रानी झाँसी रेजिमेंट कहा गया। यह नाम 1857 की क्रांति की महान नायिका रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया। इस टुकड़ी की भूमिका हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में महत्त्वपूर्ण है। इस टुकड़ी में शामिल महिलाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिया गया और युद्ध के लिए तैयार किया गया। नेताजी राष्ट्र-निर्माण और प्रगतिशील भारत के लिए सामाजिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में विशेष प्रयास किए।

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी

प्रश्न- आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय (रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
मैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस के कार्यों और विचारों से अत्यधिक प्रभावित हूँ। उन्होंने अंग्रेज़ों के अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ उठाने का हौंसला बुलंद किया। आजादी के लिए देश में नए जोश का संचार किया। नेताजी ने आज़ाद हिंद फौज (आई.एन.ए.) का गठन किया, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से भारत से बाहर निकालना था। नेताजी के ओजस्वी भाषणों ने युवा वर्ग में नवीन चेतना और स्वाधीन राष्ट्र को प्राप्त करने का संकल्प पैदा किया।

उनके द्वारा दिया गया नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” आज भी हम बच्चों को देशभक्ति से ओत-प्रोत कर देता है।
नोट – छात्र सामूहिक गतिविधी के रूप में या रोल प्ले अध्यापक की सहायता से कक्षा में प्रस्तुत करें।

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।”

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ नारे के माध्यम से आह्वान किया था। स्वाधीनता संग्राम के दौरान और भी बहुत से नारे दिए गए। ये नारे स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, निर्भीकता और देश-प्रेम को दर्शाते हैं।
नीचे स्तंभ 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया ? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

उत्तर:

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 12

नारा

स्वतंत्रता सेनानी

Question 1 (1)

स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।

बाल गंगाधर तिलक

2. करो या मरो

महात्मा गाँधी

3. मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगा

चंद्रशेखर आज़ाद

4. इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद

भगत सिंह

5. पूर्ण स्वराज

जवाहरलाल नेहरु

परियोजना कार्य

आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुने।

Solution:

अकबरी लोटा (Akbari_Lota) Diagram 13

साझी समझ

उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
गृह एवं कुटीर उद्योग में कारीगरों द्वारा कम पूँजी और कुशलता से अपने हाथों के माध्यम से घरों में वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में इनका अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है।

  1. हथकरघा एवं बुनाई उद्योग – घरों में कारीगर पारंपरिक करघे (हैंडलूम) के माध्यम से दुपट्टों, साड़ियों और चादरों की बुनाई करते हैं।
  2. दूध उत्पादों से जुड़े उद्योग – घी, पनीर, दही का निर्माण कर उसे स्थानीय इलाकों में बेचा जाता है। कई घरों में डेयरी कार्य भी चलता है।

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके आप सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म देख सकते हैं।

  • ‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

प्रश्न-अभ्यास

Question 1

कहानी में मोटे-मोटे किस काम के हैं? किन के बारे में और क्यों कहा गया?
Solution: कहानी में ‘मोटे-मोटे किस काम के हैं’ बच्चों के बारे में कहा गया है क्योंकि वे घर के कामकाज में जरा सी भी मदद नहीं करते थे तथा दिन भर उधम मचाते रहते थे। इस तरह से ये कामचोर हो गए थे।

Question 2

बच्चों के ऊधम मचाने के कारण घर की क्या दुर्दशा हुई?
Solution: बच्चों के उधम मचाने से घर अस्त-व्यस्त हो गया। मटके-सुराहियाँ इधर-उधर लुढक गए। घर के सारे बर्तन अस्त-व्यस्त हो गए। पशु-पक्षी इधर-उधर भागने लगे। घर में धूल, मिट्टी और कीचड़ का ढ़ेर लग गया। मटर की सब्जी बनने से पहले भेड़ें खा गईं। मुर्गे-मुर्गियों के कारण कपड़े गंदे हो गए। इस वजह से पारिवारिक शांति भी भंग हो गई। अम्मा ने तो घर छोड़ने का भी फैसला ले लिया।

Question 3

“या तो बच्चाराज कायम कर लो या मुझे ही रख लो।” अम्मा ने कब कहा? और इसका परिणाम क्या हुआ?
Solution: अम्मा ने बच्चों द्वारा किए गए घर के हालत को देखकर ऐसा कहा था। जब पिताजी ने बच्चों को घर के काम काज में हाथ बँटाने को कहा तब उन्होंने इसके विपरीत सारे घर को तहस-नहस कर दिया। जिससे अम्मा जी बहुत परेशान हो गई थीं। इसका परिणाम ये हुआ कि पिताजी ने घर की किसी भी चीज़ को बच्चों को हाथ ना लगाने कि हिदायत दे डाली। अगर किसी ने घर का काम किया तो उसे रात का खाना नहीं दिया जाएगा।

Question 4

‘कामचोर’ कहानी क्या संदेश देती है?
Solution: यह एक हास्यप्रधान कहानी है। यह कहानी संदेश देती है की बच्चों को घर के कामों से अनभिज्ञ नहीं होना चाहिए। उन्हें उनके स्वभाव के अनुसार, उम्र और रूचि ध्यान में रखते हुए काम कराना चाहिए। जिससे बचपन से ही उनमें काम के प्रति लगन तथा रूचि उत्पन्न हो न कि ऊब।

Question 5

क्या बच्चों ने उचित निर्णय लिया कि अब चाहे कुछ भी हो जाए, हिलकर पानी भी नहीं पिएँगे।
Solution: बच्चों द्वारा लिया गया निर्णय उचित नहीं था क्योंकि स्वयं हिलकर पानी न पीने का निश्चय उन्हें और भी कामचोर बना देगा। वे कभी-भी कोई काम करना सीख ही नहीं पाएँगें। बच्चों को काम तो करना चाहिए पर समझदारी के साथ। बड़ों को उनको काम सिखाना चाहिए और आवश्यकता अनुसार मार्गदर्शन देना चाहिए।

Question 6

घर के सामान्य काम हों या अपना निजी काम, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुरूप उन्हें करना आवश्यक क्यों है?
Solution: अपनी क्षमता के अनुसार काम करना इसलिए जरूरी है क्योंकि क्षमता के अनुरूप किया गया कार्य सही और सुचारु रूप से होता है। यदि हम अपने घर का काम या अपना निजी काम, नहीं करेंगे तो हम कामचोर बन जाएँगे। हमें अपने कामों के लिए आत्मनिर्भर रहना चाहिए।

Question 7

भरा-पूरा परिवार कैसे सुखद बन सकता है और कैसे दुखद? कामचोर कहानी के आधार पर निर्णय कीजिए।
Solution: भरा-पूरा परिवार तब सुखद बन सकता है जब सब मिल-जुलकर कार्य करें व दुखद तब बनता है जब सब स्वार्थ भावना से कार्य करें। कामों के क्षमतानुसार विभाजित करने से कहानी जैसी दुखद स्थिति से बचा जा सकता है। कार्यों को बाँटने से किसी दूसरे को काम करने के लिए कहने की जरुरत होगी और तनाव भी उत्पन्न नहीं होगा।

Question 8

बड़े होते बच्चे किस प्रकार माता-पिता के सहयोगी हो सकते हैं और किस प्रकार भार? कामचोर कहानी के आधार पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Solution: बडे होते बच्चे यदि माता-पिता को छोटे-मोटे कार्यों में मदद करें तो वे उनके सहयोगी हो सकते हैं जैसे अपना कार्य स्वयं, अपने-आप स्कूल के लिए तैयार हो जाएँ, अपने खाने के बर्तन यथा सम्भव स्थान पर रख आएँ, अपने कमरे को सहज कर रखें।
यदि हम बच्चों को उनका कार्य करने की सीख नहीं देते तो वह सहयोग के स्थान पर माता-पिता के लिए भार ही साबित होंगे। उनके बड़ा होने पर उनसे कोई कार्य कराया जाएगा तो वह उस कार्य को भली-भांति करने के स्थान पर तहस-नहस ही कर देंगे, जैसे की कामचोर लेख पर बच्चों ने सारे घर का हाल कर दिया था। इसलिए माता-पिता को बच्चों को उनके स्वभाव के अनुसार, उम्र और रूचि ध्यान में रखते हुए काम कराना चाहिए। जिससे बचपन से ही उनमें काम के प्रति लगन तथा रूचि उत्पन्न हो न कि ऊब। और उनके सहयोगी हो सके।

Question 9

‘कामचोर’ कहानी एकल परिवार की कहानी है या संयुक्त परिवार की? इन दोनों तरह के परिवारों में क्या-क्या अंतर होते हैं?
Solution: कामचोर कहानी सयुंक्त परिवार की कहानी है इन दोनों में अन्तर इस प्रकार है –
एकल परिवार में सदस्यों की संख्या तीन से चार होती है – माँ, पिता व बच्चे होते है। सयुंक्त परिवार में सदस्यों की संख्या ज़्यादा होती है क्योंकि इसमें चाचा-चाची ताऊजी-ताईजी, माँ-पिताजी, बच्चे सभी सम्मिलित होते हैं। एकल परिवार में सारा कार्य स्वयं करना पड़ता है जबकि संयुक्त परिवार में सबलोग मिल-जुलकर कार्य करते हैं। एकल परिवार में जीवन के सुख-दुख का अकेले सामना करना पड़ता है जबकि सयुंक्त परिवार में सारे सदस्य मिलकर जीवन के सुख-दुख का सामना करते है।

भाषा की बात

Question 1

“धुली-बेधुली बालटी लेकर आठ हाथ चार थनों पर पिल पड़े।” धुली शब्द से पहले ‘बे’ लगाकर बेधुली बना है। जिसका अर्थ है ‘बिना धुली’ ‘बे’ एक उपसर्ग है।
‘बे’ उपसर्ग से बननेवाले कुछ और शब्द हैं –
बेतुका, बेईमान, बेघर, बेचैन, बेहोश आदि। आप भी नीचे लिखे उपसर्गों से बननेवाले शब्द खोजिए –
1. प्र ……………….
2. आ ……………….
3. भर ……………….
4. बद​ ……………….
Solution:
1. प्र – प्रबल, प्रभाव, प्रयोग, प्रचलन, प्रवचन
2. आ – आमरण, आभार, आजन्म, आगत
3. भर – भरपेट, भरपूर, भरमार, भरसक
4. बद – बदसूरत, बदमिज़ाज, बदनाम, बदतर

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