NCERT Solutions • Class 6 Hindi (Malhar - मल्हार) |
Click here to access the bestNCERT Solutions Class 6 HindiMalhar Chapter 9 Question Answer मैया मैं नहिं माखन खायो textbook exercise questions and answers.
मैया मैं नहिं माखन खायो Class 6th Hindi Malhar Chapter 9 Question Answer
मैया मैं नहिं माखन खायो Class 6 Question Answer
पाठ से
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर न-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-
प्रश्न 1
|
प्रश्न 2
|
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने ?
उत्तर:

मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

शब्द | अर्थ या संदर्भ |
Question 1 (1)
जसोदा | 1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)। |
2. पहर | 2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।) |
3. लकुटि कमरिया | 3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीजों (जैसे- दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें। |
4. बंसीवट | 4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
5. मधुबन | 5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
6. छीको | 6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी। |
7. माता | 7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
8. ग्वाल-बाल | 8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे) |
2. → 1
3. → 8
4. → 2
5. → 7
6. → 3
7. → 5
8. → 6
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(क) “ भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो ”
उत्तर:
श्रीकृष्ण माँ यशोदा से कहते हैं कि प्रात: होते ही तुम मुझे मधुबन में गौओं को चराने के लिए भेज देती हो।
(ख) “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो ”।
उत्तर:
सूरदास कहते हैं कि माँ यशोदा कृष्ण की बाते सुनकर हँस पड़ी और उन्हें गले से लगा लिया।
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
उत्तर:
पद में श्रीकृष्ण ने माता यशोदा से अपने बारे में सफ़ाई देते हुए कहा कि-
मैया मैंने माखन नहीं खाया। प्रातः होते ही मैं गौओं को चराने वन में चला जाता हूँ और सुबह से शाम तक वन में ही रहता हूँ। शाम को ही घर आता हूँ। मैं तो छोटा – बालक हूँ, मेरे हाथ भी छोटे ही हैं। मेरे हाथ किस प्रकार छींके तक पहुँच सकते हैं। ये सभी ग्वाल-बाल तो मेरे बैरी (शत्रु, दुश्मन) हैं, ये मेरे मुँह पर जबरदस्ती माखन लगा देते हैं। माता आप बहुत ही भोली हो जो इनके कहने में आ जाती हो। आपके हृदय में मेरे प्रति कुछ संदेह है तभी आप मुझे पराया समझती हो। आप ये अपनी लाठी और कंबल ले लो। ये मुझे बहुत नाच नचाते हैं।
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
उत्तर
माता यशोदा श्रीकृष्ण के इस मासूमियत भोलेपन पर (रीझकर) प्रसन्न होकर उन्हें अपने गले लगा लेती हैं।
कविता की रचना
‘भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहिपठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घरआयो।।
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘पठायो’ और ‘आयो’ दोनों शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है। अनेक कवि अपनी रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने – अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
छात्र/छात्राएँ स्वयं करें।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
उत्तर:
इस पद में कृष्ण के बाल स्वरूप का चित्रण है। प्रत्येक बच्चा गलती करने के बाद, उस गलती को छिपाने के लिए तर्क देता है। ऐसे ही श्रीकृष्ण भी माँ को तर्क दे रहे हैं। कि उन्होंने माखन नहीं खाया। ग्वाल-बालों ने उनके मुख पर लगा दिया है ताकि माँ यशोदा उन्हें डाटें।
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
उत्तर:
माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को जब गले से लगाया होगा तो उनका सारा क्रोध समाप्त हो गया होगा और कृष्ण के प्रति प्रेम उमड़ आया होगा।
शब्दों के रूप
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।
(क) “ भोर भयो गैयन केपाछे”
इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए।
• परे ……………………
उत्तर:
• परेहोने पर
• छोटो …………….
उत्तर:
• छोटोछोटा
• बिधि ……………
उत्तर:
• बिधिप्रकार
• भोरी ………………..
उत्तर:
• भोरीप्रातःकाल
• कछु ……………
उत्तर:
• कछुकुछ
• लै लेना ……………
उत्तर:
• लैलेना
• नहिं नहीं
उत्तर:
• नहिंनहीं
(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए-

स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
Question 2 (1)
उपजि | 1. मुसकाई, हँसी |
2. जानि | 2. उपजना, उत्पन्न होना |
3. जायो | 3. जानकर, समझकर |
4. जिय | 4. विश्वास किया, सच माना |
5. पठायो | 5. बाँह हाथ, भुजा |
6. पतियायो | 6. प्रकार, भाँति, रीति |
7. बहियन | 7. मन, जी |
8. बिधि | 8. जन्मा |
9. बिहँसी | 9. मला लगाया, पोता |
10. भटक्यो | 10. इधर-उधर घूमा या भटका |
11. लपटायो | 11. भेज दिया |
2. → 3
3. → 8
4. → 7
5. → 11
6. → 4
7. → 5
8. → 6
9. → 1
10. → 10
11. → 9
वर्ण-परिवर्तन
“तू माता मन की अतिभोरी‘
‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
जैसे- ‘पड़े’ के स्थान पर ‘परे’ का प्रयोग। छात्र / छात्राएँ स्वयं भी करें।
पंक्ति से पंक्ति
नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
Question 3 (1)
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | 1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीकें तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | 2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। |
3. मैं बालक बहिंयन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | 3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। |
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | 4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | 6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |





