NCERT Solutions • Class 7 Hindi (Malhar - मल्हार) |
Teachers encourage the use ofMalhar Chapter 9 चिड़िया कविता के प्रश्न उत्तर Question Answer for better language learning.
NCERT Class 7th Hindi Chapter 9 चिड़िया Question Answer
चिड़िया Class 7 Question Answer
कक्षा 7 हिंदी पाठ 9 प्रश्न उत्तर – Class 7 Hindi चिड़िया Question Answer
पाठ से
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन – सा है ? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1
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प्रश्न 2
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प्रश्न 3
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(ख) अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
मिलकर करें मिलान
• कविता में से चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर बातचीत कीजिए और इन्हें इनके सही भावों से मिलाइए। इनके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
1. – 5
2. – 1
3. – 4
4. – 3
5. – 2

पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचें दी गई हैं, इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

(क) “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की,
रीति हमें सिखलाती है ! ”
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियों का अर्थ यह है कि चिड़िया पीपल के पेड़ की डाली पर बैठकर मधुर गीत गाती है। अपने गीत के द्वारा वह मनुष्य को प्रेम और सौहार्द से जीवन जीने का तरीका सिखाती है। वह मनुष्य को वैर और द्वेष की भावना को छोड़ने की प्रेरणा देती है।
(ख) “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं।”
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियों का अर्थ यह है कि पक्षियों के मन में न तो कोई लालच होता है, न ही कोई पाप की भावना और न ही किसी चीज़ की अत्यधिक चिंता। कहने का भाव यह है कि पक्षी लालचमुक्त जीवन जीते हैं।
(ग) “सीमा- हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं।’
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियों का अर्थ यह है कि पक्षी सीमा हीन यानी जिसकी कोई सीमा नहीं है, ऐसे आकाश में स्वतंत्रता से उड़ते हैं और बिना डर के वहाँ विचरण करते हैं। भाव यह है कि पक्षी स्वतंत्र रूप से आकाश में निर्भीक होकर उड़ते हैं।
सोच-विचार के लिए
नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ और उनसे संबंधित प्रश्न दिए गए हैं। कविता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल- -जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे (मनुष्य) लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि पक्षी बिना किसी मतभेद के मिल-जुलकर रहते हैं। अगर हम भी मिलकर रहें और काम करें तो समाज में तनाव, टकराव और स्वार्थ की भावना कम हो सकती है। एकजुटता से समाज में समानता, भाईचारा और प्रेम की भावना विकसित होती है। जब हम ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर बढ़ते हैं तो असली मानवता का विकास होता है। इसलिए हमें भी पक्षियों की तरह मिल-जुलकर रहना, खाना और जीना सीखना चाहिए।
(ख) “जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं” पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?
उत्तर:
पक्षी अपनी आवश्यकतानुसार ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न है क्योंकि मनुष्य भविष्य की चिंता में या स्वार्थवश अकसर अपनी आवश्यकता से कहीं अधिक संग्रह करता है। ज्यादा संचित करने की सोच में वह दूसरों के हिस्से पर भी कब्ज़ा कर लेता है। इससे उसमें लालच, भय और असंतोष उत्पन्न हो जाता है।
(ग) “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में ? ” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?
उत्तर:
पक्षियों को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में इसलिए बताया गया है क्योंकि पक्षी बंधन से मुक्त होते हैं। उन्होंने अपनी इच्छाओं, स्वार्थ और संग्रह की प्रवृति को सीमित रखा है, जबकि मनुष्य बेड़ियों में बंधा हुआ है। वह अपने विचारों, इच्छाओं और समाज द्वारा तय की गई सीमाओं में उलझा हुआ है। वह बाहर से आज़ाद दिखता है किंतु भीतर से बंध नों में जकड़ा हुआ है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर संवाद कीजिए-
प्रश्न 1
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मनुष्य को निम्नलिखित कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं हैं-
प्रश्न 2
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प्रश्न 3
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(विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार उत्तर लिखें।)
प्रश्न 4
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मैं ये सब बातें चिड़िया से करता क्योंकि ये सब पूछकर मैं उसकी स्वतंत्रता, स्वच्छंदता तथा उन्मुक्तता के बारे में जानना चाहता हूँ।
कविता की रचना

“सबमिल-जुलकररहते हैं वे,
सबमिल-जुलकरखाते हैं”
• रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इस तरह की शैली प्राय: कविता में आती है। अब आप सब मिल-जुलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए-
संकेत– सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे
सब मिल-जुलकर गाते हैं …….
…………………………….
…………………………….
उत्तर:
जीवनसाझाजीते हैं
वे सुख-दुःखसाझाकरते हैं।
भाषा की बात
“पीपल की ऊँची डाली पर
बैठी चिड़ियागातीहै!
तुम्हें ज्ञात क्या अपनी
बोली में संदेशसुनातीहै ?”
• रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘गाती’ और सुनाती’ रेखांकित शब्दों से चिड़िया के गाने और सुनाने के कार्य का बोध होता है। वे शब्द जिनसे कार्य करने या होने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में ऐसे क्रिया शब्दों को ढूँढकर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
कविता में आए क्रिया शब्द तथा उनसे बने वाक्य निम्नलिखित हैं-
पाठ से आगे
भावों की बात
(क) जब आप नीचे दिए गए दृश्य देखते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है? अपने उत्तर के कारण भी सोचिए और बताइए। आप नीचे दिए गए भावों में से शब्द चुन सकते हैं। आप किसी भी दृश्य के लिए एक से अधिक शब्द भी चुन सकते हैं।
उत्तर:
(विद्यार्थी अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके उपर्युक्त उत्तरों के कारण कक्षा में एक-दूसरे से साझा करें।)

(ख) उपर्युक्त भावों में से आप कौन-से भाव कब-कब अनुभव करते हैं? भावों के नाम लिखकर उन स्थितियों के लिए एक-एक वाक्य लिखिए।
(संकेत-आत्मविश्वास – जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ।)
उत्तर:
(विद्यार्थी स्वयं भावों के नाम लिखकर उनसे एक-एक वाक्य बनाएँगे।)
आज की पहेली
• कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़े। अब आपके सामने पक्षियों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पक्षियों को पहचानकर सही चित्रों के साथ रेखा खींचकर जोड़िए-
उत्तर:


चित्र की बात

दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए (पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 123 देखें) और बताइए।
• आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पंसद करेंगे और क्यों?
उत्तर:
मैं पक्षियों को तीसरे चित्र में देखना पसंद करूँगा क्योंकि पक्षियों को स्वतंत्र और प्राकृतिक वातावरण बेहद पसंद होता है। वहाँ वे बिना किसी डर रह सकते हैं। वे अपनी मर्ज़ी से उड़ सकते हैं, गा सकते है तथा कहीं भी आ-जा सकते हैं। पक्षियों की असली खुशी उनके खुले पंखों में होती है, पिंजरों या ऊँची-ऊँची इमारतों में नहीं। अतः खुले बाग-बगीचे या उपवन ही पक्षियों के रहने के लिए उचित स्थान है।
निर्भय विचरण

“सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं” ”
• कविता की इन पंक्तियों को पढ़िए और दिए गए चित्रों को देखिए (पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 123 देखकर)। इन चित्रों को देखकर आपके मन में क्या विचार आ रहे हैं?
(संकेत – जैसे इन चित्रों में कौन निर्भय विचरण कर रहा है?)
उत्तर:
दिए गए चित्रों को देखकर हमारे मन में कई विचार आ रहे हैं; जैसे-
पहले चित्र में पशु-पक्षी स्वतंत्र रूप से जंगल में विचरण कर रहे हैं और मनुष्य गाड़ी में बंद होकर उन्हें देख रहे हैं, जबकि दूसरे चित्र में पशु-पक्षी पिंजरों में कैद हैं और मनुष्य स्वतंत्र रूप से घूमकर उन्हें देख रहे हैं। अत: पहला चित्र पशु-पक्षियों की स्वतंत्रता को और दूसरा चित्र उनकी पराधीनता को व्यक्त कर रहा है। यह देखकर हमारे मन में दुख और आक्रोश का भाव उत्पन्न हो रहा है। पशु-पक्षी स्वतंत्र रूप से रहना पसंद करते हैं, उन्हें पिंजरे में कैद करके उनकी स्वतंत्रता समाप्त की जा रही है, जो कि किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
साथ-साथ

“वन में जितने पंछी हैं, खंजन,
कपोत, चातक, कोकिल;
काक, हंस, शुक आदि वास
करते सब आपस में हिलमिल!”
प्रश्न 1
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प्रश्न 2
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(विद्यार्थी अपने विचार साझा कर सकते हैं।)
शब्द एक अर्थ अनेक
(पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 124 पर देखें।)
• दिए गए शब्दों का अलग-अलग अर्थों या संदर्भों में प्रयोग कीजिए-
उत्तर:
(क) कर
(ख) जल
(ग) अर्थ
(घ) फल
(ङ) आम
रचनात्मकता
(क) खुले आसमान में, पेड़ों की टहनियों, छतों और भवनों आदि पर बैठे या उड़ते पक्षी बहुत मनमोहक लगते हैं। अपनी पसंद के ऐसे कुछ दृश्यों का कोलाज बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
(ख) “स्वतंत्रता और प्रेम” का संदेश देने वाला एक पोस्टर बनाइए। इसमें इस कविता की कोई पंक्ति या संदेश भी सम्मिलित कीजिए।
(विद्यार्थी स्वयं करें।)
हमारा पर्यावरण
• मनुष्य बिना सोचे-समझे जंगलों की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे पशु-पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्यों की एक सूची बनाइए, जिनसे पर्यावरण व हमारे परिवेश के पशु-पक्षियों के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस संकट की स्थिति से बचने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं? लिखिए। आप इस कार्य में शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्य, जिनसे पर्यावरण व हमारे परिवेश के पशु-पक्षियों के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है, वे निम्नलिखित हैं-
इस संकट से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं-
(विद्यार्थी स्वयं अपने विचार साझा करें।)
परियोजना कार्य
(क) पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपने स्तर पर कुछ प्रयास कर सकते हैं। आप अपने विद्यालय, आस-पास और घरों में देखिए कि किन-किन कार्यों में प्लास्टिक के थैले का प्रयोग किया जाता है? उन कार्यों की सूची बनाइए। अब इनमें प्रयोग किए जा रहे प्लास्टिक के थैलों के विकल्पों पर विचार कीजिए और लिखिए।
(संकेत — जैसे- हम प्लास्टिक के थैले की जगह कागज या कपड़े के थैले का प्रयोग किन – किन कार्यों में कर सकते हैं।)
उत्तर:
• विद्यालय, हमारे आसपास और घरों में प्लास्टिक के थैलों का प्रयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाता है-
प्लास्टिक के थैलों के विकल्प निम्नलिखित हैं-
(ख) सभी विद्यार्थी ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं मिलकर सामूहिक रूप से ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार कर विद्यालय में प्रस्तुत करें।
झरोखे से
कविता में पक्षियों के ‘सीमा हीन गगन में उड़ने’ की बात कही गई है। पक्षियों का आकाश में उड़ना उद्देश्यपूर्ण है। पक्षियों की उड़ान से जुड़ी एक रोचक जानकारी आगे दी गई है। इसे पढ़कर आप पक्षियों की उड़ान से जुड़े कुछ नए तथ्यों को जान पाएँगे।
पक्षियों की प्रवास यात्राएँ
पक्षियों की प्रवास यात्राएँ सब से विचित्र और रहस्यपूर्ण होती हैं। हर साल शरद ऋतु और शुरू जाड़ों में अनेक पक्षी एशिया, यूरोप तथा अमरीका के उत्तरी भागों में स्थित अपने स्थानों से चलकर गरम देशों में आ जाते हैं। वसंत तथा गरमियों में वे फिर वापस उत्तर में पहुँच जाते हैं।
वे समय के इतने पक्के होते हैं कि इनके आने-जाने के एक-एक दिन की ठीक गणना की जा सकती है। हाँ, प्रतिकूल मौसम के कारण कभी देर हो जाए तो बात दूसरी है।
कुछ प्रजातियों के पक्षी थोड़े ही दूरी पर जाते हैं। हर पक्षी थोड़ा बहुत तो इधर-उधर जाता-आता है ही। कभी रहन-सहन के कष्टों के कारण तो कभी खाना कम हो जाने के कारण इस प्रकार का आवागमन मुख्यतः उत्तर भारत में देखने को मिलता है जहाँ पर मौसम भिन्न-भिन्न और तीव्रता लिए हुए होते हैं।
जो पक्षी ऊँचे पहाड़ों पर गरमियाँ बिताते हैं वे जाड़ों में निचली पहाड़ियों, तराई अथवा मैदानों में चले आते हैं। इस प्रकार का आवागमन भारत में बहुत अधिक पाया जाता है, जहाँ गंगा के क्षेत्र के बराबर ही विशाल हिमालय है।

इन छोटे-छोटे वीर यात्रियों को अपनी समस्त लंबी-लंबी यात्राओं के बीच भारी कष्ट झेलने पड़ते हैं और बड़े-बड़े संकटों का सामना करना पड़ता है। कभी जंगलों, कभी मैदानों और कभी समुद्र के ऊपर से गुजरना होता है। कभी भयंकर तूफ़ान आ जाते हैं और वे अपने मार्ग से भटक जाते हैं। बहुधा वे आँधियों के थपेड़ों से समुद्र की ओर पहुँच जाते हैं और फिर एकदम नीचे पठारों में समा जाते हैं। रात को नगर का तीव्र प्रकाश इन्हें भटका देता है।
कुछ पक्षी बीच में रुक-रुक कर यात्रा करते हैं।
ताकि थकान न हो। कुछ ऐसे पक्षी भी हैं जो खाने और आराम करने के लिए बिना रुके लगातार बहुत लंबी-लंबी यात्राएँ पूरी कर लेते हैं। कुछ पक्षी केवल दिन में उड़ते हैं तो कुछ दिन और रात दोनों समय किंतु अधिकतर पक्षी सूर्यास्त के बाद अपनी यात्रा पर बढ़ते जाते हैं।
पक्षी प्रायः दल बनाकर उड़ते हैं। सारस और हंस जब आकाश में ‘वी’ (V) की आकृति में उड़ते जाते हैं तब तुरंत हमारा ध्यान उधर खिंचा चला जाता है। अबाबील, चकदिल, फुदकी, समुद्रतटीय पक्षी तथा जलपक्षी दलों में इकट्ठे हो जाते हैं। प्रत्येक दल में एक ही प्रकार के पक्षी होते हैं। हर दल में परों की तेज फड़फड़ाहट और चहचहाहट होती है। उसके बाद वे धरती से हवा में उठ जाते हैं और आकाश को चीरते हुए आगे ही आगे बढ़ते जाते हैं।
– पक्षी जगत, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली
• कविता में पक्षियों के ‘सीमा – हीन गगन में उड़ने’ की बात कही गई है। पक्षियों का आकाश में उड़ना उद्देश्यपूर्ण है। पक्षियों की उड़ान से जुड़ी एक रोचक जानकारी आगे दी गई है। इसे पढ़कर आप पक्षियों की उड़ान से जुड़े कुछ नए तथ्यों को जान पाएँगे।
उत्तर:
विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दी गई पक्षियों की उड़ान से जुड़ी रोचक जानकारी पढ़कर उससे जुड़े नए तथ्यों की जानकारी प्राप्त करें।
साझी समझ
• आप इंटरनेट या किसी अन्य माध्यम की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी एकत्रित कीजिए और प्रवासी पक्षियों पर लेख लिखिए।
उत्तर:
प्रवासी पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी-
प्रवासी पक्षियों पर लेख
प्रवासी पक्षी वे होते हैं जो बदलते मौसम, भोजन की तलाश या प्रजनन के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं और फिर वापस लौटते हैं। प्रवासी पक्षी मुख्यत: सर्दियों और गर्मियों में स्थान बदलते हैं। जब किसी क्षेत्र में बहुत ठंड या गर्मी हो जाती है और वहाँ भोजन मिलना मुश्किल हो जाता है, तो ये पक्षी ऐसे क्षेत्रों की ओर उड़ जाते हैं जहाँ मौसम अनुकूल हो और भोजन उपलब्ध हो। प्रवासी पक्षी प्रकृति का अद्भुत उपहार हैं। इनकी लंबी यात्राएँ हमें यह सिखाती हैं कि धैर्य, दिशा और उद्देश्य के साथ किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। इन पक्षियों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इनकी खूबसूरती और अद्भुत प्रवास को देख सके।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जीव-जगत के बारे में और भी जान-समझ सकते हैं—
(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दिए गए लिंक की सहायता से जीव-जगत के बारे में विस्तार से समझें।)
कहानी से
प्रश्न 1.
किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था?
उत्तर-
माधवदास की बड़ी कोठी, सुंदर बगीचा, रहने का ठाठ-बाट रईसों जैसा था। चिड़िया के साथ वार्तालाप में कहना कि तेरा सोने का पिंजरा बनावा दूंगा और उसे मालामाल कर देने की बात कहता है। इसके अलावा वह स्वयं स्वीकार करता है। कि उसके पास कई कोठियाँ, बगीचे और नौकर-चाकर हैं। इन बातों से उसकी संपन्नता का पता चलता है। इसके अलावे वह अकेलेपन को दूर करने के लिए चिड़िया के साथ रहने के लिए मजबूर था, यह बात दर्शाता है कि सारी सुविधाओं के बाद भी वह सुखी नहीं था।
प्रश्न 2
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माधवदास का ऐसा कहना पूरी तरह से निस्स्वार्थ मन से नहीं था। वह चिड़िया को महल में पिंजरे में बंद करके रखना चाहता था ताकि अपनी इच्छा से उसकी सुंदरता को निहार सके और उसका चहचहाना सुन सके।
प्रश्न 3
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दूसरी तरफ माधवदास की नजर में चिड़िया की ज़िद का कोई तुक न था वे तो केवल अपने बगीचे की शोभा बढ़ाने हेतु उस चिड़िया को पकड़ना चाहते थे। वे उसे सोने के पिंजरे व अन्य सामानों का प्रलोभन भी देते हैं लेकिन चिड़िया के लिए सब चीजें कोई महत्त्व नहीं रखतीं।
प्रश्न 4
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प्रश्न 5
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प्रश्न 6
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कहानी से आगे
प्रश्न 1
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प्रश्न 2
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अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1
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भाषा की बात
प्रश्न 1
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प्रश्न 2
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अन्य पाठेतर हल प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
(क) ‘चिड़िया की बच्ची’ पाठ के लेखक कौन है?
(i) प्रयाग शुक्ल
(ii) बालकृष्ण शर्मा नवीन
(iii) भवानी प्रसाद मिश्र
(iv) जैनेंद्र कुमार
(ख) शाम के वातावरण में क्या-क्या परिवर्तन हो जाता है
(i) गरमी कम हो जाती है।
(ii) हवा चलने लगती है।
(iii) आसमान रंग-बिरंगा हो जाता है।
(iv) और (i) और (iii)
(ग) माधवदास चिड़िया से क्या चाहता था?
(i) वह वहाँ खूब गाए
(ii) वह पेड़ों पर झूमे
(iii) वह वहीं रह जाए
(iv) वह वहाँ से भाग जाए।
(घ) माधवदास चिड़िया को किसका प्रलोभन दे रहे थे।
(i) सोने के पिंजरे का
(ii) पेड़ की डालियों का
(iii) घोंसले का
(iv) अपने धन/दौलत का
(ङ) बगीचा में चिड़िया कहाँ आकर बैठी थी?
(i) जमीन पर
(ii) फव्वारे पर
(iii) गुलाब की टहनी पर
(iv) टीले के पास
(च) चिड़िया की गरदन का रंग कैसा था?
(i) लाल
(ii) पीली
(iii) हरी
(iv) काली
(छ) माधवदास के बगीचे में चिड़िया के आने का मकसद था
(i) बगीचा की सुंदरता देखने का
(ii) नई कोठी की सुंदरता देखने का
(iii) खिले हुए फूल देखने का
(iv) कुछ देर आराम करने का
(क) (iv)
(ख) (i) और (iii) दोनों
(ग) (iii)
(घ) (iv)
(ङ) (iii)
(च) (i)
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
(क) माधवदास ने किसका निर्माण करवाया था?
उत्तर-
माधवदास ने एक संगमरमर की कोठी और उसके सुहावने बगीचे का निर्माण करवाया।
(ख) चिड़िया कैसी थी?
उत्तर-
चिड़िया बहुत सुंदर थी। उसकी गरदन लाल थी। उसके पंख चमकदार थे, शरीर पर चित्रकारी थी।
(ग) माधवदास ने चिड़िया से क्या कहा?
उत्तर-
माधवदास ने चिड़िया से कहा तुम बड़ी भोली हो। तुम्हें देखकर मेरा मन खुश हो जाता है।
(घ) चिड़िया किसे महत्त्व देती है और क्यों?
उत्तर-
चिड़िया अपनी माँ को सबसे अधिक महत्त्व देती है, क्योंकि वही उसके लिए दाने लाती है और वही उसके आने का इंतज़ार करती रहती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
(क) क्या माधवदास ने सचमुच ही वह बगीचा चिड़िया के लिए बनवाया था?
उत्तर-
नहीं भगवानदास ने वह बगीचा अपने लिए बनवाया था। वह तो चिड़िया को अपने जाल में फँसाना चाहता था, इसलिए ऐसा कहा था।
(ख) सेठ माधवदास ने चिड़िया की माँ के विषय में क्या कहा?
उत्तर-
सेठ माधवदास ने चिड़िया से कहा कि वह घोंसले में जा कर क्या करेगी। वहाँ तो केवल उसकी माँ है और माँ का महत्त्व क्या है। वे कहना चाह रहे थे कि उनके बाहर के बगीचे के सामने उसकी माँ का महत्त्व नहीं है।
(ग) माधवदास ने जीवन के अकेलेपन को दूर करने का क्या तरकीब निकाला?
उत्तर-
जीवन के अकेलेपन को दूर करने के लिए एक दिन अपने बगीचे में बैठा था कि एक सुंदर चिड़िया आई उसके सौंदर्य व स्वच्छंदता से थिरकने पर वह मुग्ध हो गया। वह चिड़िया को अपने पास रखकर अपने जीवन का सूनापन दूर करना चाहता था, क्योंकि उसे ऐसा लगा कि चिड़िया यदि उसके पास रहेगी तो उसकी कोठी व बगीचे में उसकी चहचहाहट से चहल-पहल बनी रहेगी।
(घ) माधवदास ने अंत में चिड़िया को कैसे पकड़वाना चाहा?
उत्तर-
काफ़ी प्रयासों के बाद जब चिड़िया माधवदास के लोभ लालच में न आई तो उसने उसे अपनी बातों में उलझा लिया। उससे लगातार बातें करते हुए अपने नौकर को संकेत करके उसे पकड़वाना चाहा लेकिन चिड़िया कठोर स्पर्श पाते ही उड़ गई।
(ङ) माँ के पास पहुँचकर चिड़िया ने क्या किया?
उत्तर-
एक कठोर स्पर्श लगते ही चिड़िया उड़ गई। तब वह उड़ती हुई एक साँस में माँ के पास गई और माँ की गोद में गिरकर सुबकने लगी ‘ओ माँ, ओ माँ।” माँ ने बच्ची को छाती से चिपकाकर पूछा क्या है मेरी बच्ची क्या है ?” वह इतना डर गई थी कि माँ के पूछने पर भी कुछ बता नहीं सकी। बड़ी देर में उसे ढाढ़स बँधा और वह माँ की छाती में ही चिपककर सो गई। मानो फिर वह कभी पलक नहीं खोलेगी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(क) माधवदास के प्रलोभनों के बावजूद चिड़िया उसके पास क्यों नहीं रुकी?
उत्तर-
माधवदास के बार-बार समझाने के बावजूद भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नज़र में चिड़िया की ज़िद का कोई तुक नहीं था। चिड़िया और माधवदास के मनोभावों में अंतर था। उनकी जरूरतें आकांक्षाएँ तथा खुशियाँ माधवदास के विपरीत थीं। माधवदास की नज़र में सोना-चाँदी, शक्ति और संपन्नता सब कुछ बड़ी थी। इन्हीं आधारों पर वह हर खुशी हासिल करना चाहते थे। चिडिया के लिए इन सब वस्तुओं का कोई मोल नहीं था। उसके लिए उसकी माँ ही सब कुछ थी। धूप, हवा और फूल में किसी चीज़ का उसके लिए कोई मोल नहीं था। उसको अपना घर और परिवार ही सबसे अच्छा लगता था। उसके लिए सोने-चाँदी, धन संपत्ति का कोई महत्व नहीं था। इसके मायने भी वे नहीं समझती थी। इन सब कारणों से माधवराव के प्रलोभनों के बावजूद चिड़िया उनके बहकावे में नहीं आई।
मूल्यपरक प्रश्न
(क) इस कहानी से आपको किस जीवन-मूल्य का बोध होता है?
उत्तर-
इस कहानी के माध्यम से हमें अपनी आज़ादी का पता चलता है। हमें किसी प्रकार के लालच में फँसकर अपनी आज़ादी नहीं खोना चाहिए। आजकल लोग सुविधा संपन्न जीवन जीते हुए भी छोटे-छोटे पशुओं व सुंदर पक्षियों को पालतू बनाकर अपने घर की शोभा बढ़ाना चाहते हैं। वे भूल जाते हैं कि धरती का कोई भी प्राणी परतंत्रता में जीना पसंद नहीं करता। प्रत्येक प्राणी अपनी स्वाभाविक प्रवृत्तियों के अनुसार जीवन जीने में खुश होता है। धन दौलत कभी वास्तविक खुशी नहीं दे सकता। माँ के स्नेह एवं आत्मीयता को किसी वस्तु से तौला नहीं जा सकता। हमें हर कीमत पर अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए।
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