NCERT Class 8 Science (Curiosity Hindi Medium - जिज्ञासा) Solutions
Chapter 13: Our Home Earth A Unique Life Sustaining Planet (Hindi Medium)
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Class 8th Science Chapter 13 Question Answer in Hindi Medium
Science Class 8 Chapter 13 Question Answer in Hindi
NCERT Class 8 Science Chapter 13 Question Answer Hindi Medium
जिज्ञासा बनाए रखें (पृष्ठ 226-227)
ऐसा कौन-सा प्रमुख कारण है जिससे वर्तमान में मंगल ग्रह पर पृथ्वी के समान जीवन संभव नहीं है?
(क) इस पर अनेक ज्वालामुखी हैं।
(ख) यह सूर्य के अधिक निकट है।
(ग) इस पर सघन वायुमंडल और द्रव जल का अभाव है।
(घ) इसका चुंबकीय क्षेत्र अत्यंत प्रबल है।
उत्तर :
(ग) इस पर सघन वायुमंडल और द्रव जल का अभाव है।
इनमें से कौन-सा भूविविधता का उदाहरण है?
(क) जंगल में विविध पक्षियों की चहचहाहट।
(ख) विभिन्न भू-आकृतियाँ, जैसे-पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल।
(ग) मानसून के समय मौसम में परिवर्तन।
(घ) तालाब में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ।
उत्तर :
(ख) विभिन्न भू-आकृतियाँ, जैसे-पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल।
यदि पृथ्वी अत्यधिक छोटी होती और उसका घनत्व समान होता तो उसके वायुमंडल का क्या होता?
(क) यह अधिक सघन और गरम हो जाता।
(ख) दुर्बल गुरुत्व के कारण यह अंतरिक्ष में चला जाता।
(ग) यह जम जाता।
(घ) इससे प्रबल पवन चलने लगती।
उत्तर :
(ख) दुर्बल गुरुत्व के कारण यह अंतरिक्ष में चला जाता।
लैंगिक जनन में संतति अपने माता-पिता से भिन्न क्यों होती हैं?
(क) उनकी वृद्धि विभिन्न जलवायु में होती है।
(ख) वह विभिन्न प्रकार का भाजन ग्रहण करते हैं।
(ग) वह जन्म के पश्चात नए आनुवंशिक अनुदेश प्राप्त करते हैं।
(घ) वह माता-पिता दोनों से मिश्रित अनुदेश (जीन) प्राप्त करते हैं।
उत्तर :
(घ) वह मातां-पिता दोनों से मिश्रित अनुदेश (जीन) प्राप्त करते हैं।
आपने मानसून के पश्चात अपने विद्यालय की दीवार की दरारों में छोटे-छोटे हरे पौधे उगते देखे होंगे। आपके अनुसार ये बीज कहाँ से आए? किन परिस्थितियों ने इन पौधों को वहाँ उगने में सहायता की होगी?
उत्तर :
ये बीज हवा, आस-पास की मिट्टी या पौधों से आए होंगे। इन्हें हवा, पक्षियों या कीड़ों ने फैलाया होगा। मानसून के दौरान बारिश से पानी मिलता है, जो बीजों के अंकुरण के लिए बहुत जरूरी है। दीवार की दरारों में पानी और नमी रुक जाती है, जिससे पौधों को बढ़ने के लिए सही परिस्थितियाँ मिलती हैं।
कुछ समय पूर्व ही एक शहर में नई सड़कें और भवन बनाने के लिए जंगल का एक बड़ा भाग काट दिया गया। यह स्थानीय जलवायु एवं जैव विविधता को किस प्रकार प्रभावित करेगा? इससे स्थानीय क्षेत्र में जल की उपलब्धता अथवा गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर :
जब जंगल का बड़ा भाग काटा जाता है, तो इससे स्थानीय जलवायु और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- जलवायु पर प्रभाव : जंगलों की कटाई से तापमान बढ़ सकता है और वर्षा की मात्रा में कमी आ सकती है। पेड़ हवा में नमी बनाए रखते हैं, जिससे बारिश होती है।
- जल की उपलब्धता : जंगलों के कटने से जल स्रोतों जैसे नदियों और झीलों में पानी की मात्रा कम हो सकती है। पेड़ जल को सोखते हैं और उसे धीरे-धीरे छोड़ते हैं, जिससे जल स्तर स्थिर रहता है।
- जल की गुणवत्ता : जब जंगल काटे जाते हैं, तो मिट्टी का कटाव बढ़ता है। इससे नदियों और झीलों में गंदगी और प्रदूषण बढ़ सकता है, जिससे जल की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
एक मित्र कहता है, “पृथ्वी पर अतीत में भी जलवायु परिवर्तन होते रहे हैं इसलिए आज का वैश्विक तापन कोई नई बात नहीं है।” आपने अपनी विज्ञान की पुस्तक के इस अध्याय एवं अन्य अध्यायों में जो सीखा है उसका उपयोग करके आप क्या प्रतिक्रिया देंगे?
उत्तर :
हमें यह समझना चाहिए कि आज का जलवायु परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहा है और इसके कारण मानव गतिविधियाँ हैं, जैसे कि जीवाश्म ईंधनों का जलाना। पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पहले की तुलना में अधिक गंभीर हैं। उदाहरण के लिए, तापमान में थोड़ी-सी वृद्धि से हिमनद पिघल सकते हैं. जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ता है और बाढ़ जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता का हनन और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ता है, जिससे कई जीव-जंतु विलुप्त हो सकते हैं।
कल्पना कीजिए कि यदि पृथ्वी पर उसका चुंबकीय क्षेत्र अचानक लुप्त हो जाए तो पृथ्वी पर जीवन के लिए किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं :
- हानिकारक कणों का प्रवेश : चुंबकीय क्षेत्र हमारे वायुमंडल को हानिकारक कॉस्मिक किरणों और सौर पवन से बचाता है।
- ओजोन परत का क्षय : चुंबकीय क्षेत्र ओजोन परत की रक्षा करता है। इसके बिना, पराबैंगनी किरणें अधिक मात्रा में पृथ्वी पर पहुँचेंगी. जिससे त्वचा कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
- जलवायु परिवर्तन : चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की जलवायु को स्थिर रखने में मदद् करता है।
मंगल ग्रह पर मनुष्यों के लिए एक नई बस्ती की अभिकल्पना बनाने के कार्य का उत्तरदायित्व दिया गया है। वहाँ मानव जीवन को बनाए रखने के लिए आपको पृथ्वी पर उपलब्ध तीन वस्तुएँ मंगल ग्रह पर पुनः बनानी होंगी। इनमें से किस वस्तु को वहाँ प्रतिकृत करना सबसे कठिन लगता है और क्यों?
उत्तर :
पृथ्वी पर उपलब्ध तीन महत्वपूर्ण वस्तुएँ चाहिए :
- जल : यह जीवन के लिए आवश्यक है।
- वायु : ऑक्सीजन की जरूरत होती है।
- पौधे : भोजन और ऑक्सीजन का स्रोत।
इनमें से ‘जल’ को मंगल ग्रह पर पुन: उत्पन्न करना सबसे कठिन लगता है। इसका कारण यह है कि मंगल ग्रह पर जल की मात्रा बहुत कम है और इसे तरल रूप में बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण है।
एक गाँव में विगत वर्षों से तापमान में वृद्धि हो रही है एवं वर्षा अप्रत्याशित हो गई है। इस परिवर्तन का क्या कारण हो सकता है? ऐसे दो उपाय बताइए जिन्हें अपना कर यह गाँव उन नई परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन कर सके।
उत्तर :
गाँव में तापमान में वृद्धि और वर्षा के अप्रत्याशित होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, और औद्योगिक प्रदूषण। इस स्थिति के अनुकूलन के लिए दो उपाय हैं:
- वृक्षारोपण : गाँव में अधिक पेड़ लगाने से तापमान को कम करने और वर्षा को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पेड़ वायुमंडल में ऑक्सीजन बढ़ाते हैं और जलवायु को संतुलित रखते हैं।
- वृष्टि संचयन : वर्षा के पानी को संचित करने के लिए तालाब या जलाशय बनाना। इससे गाँव में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है और सूखे के समय में पानी उपलब्ध रहेगा।
यदि पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो क्या यह पृथ्वी पर जीवन, तापमान एवं जल को प्रभावित करता? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
यदि पृथ्वी पर वायुमंडल नहीं होता, तो जीवन, तापमान और जल पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता। वायुमंडल सूर्य की हानिकारक किरणों से रक्षा करता है और तापमान को संतुलित रखता है। इसके बिना जल भी तेजी से वाष्पित हो जाता। इसलिए, वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक है।
कायिक प्रवर्धन के पाँच उदाहरणों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर :
कायिक प्रवर्धन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिससे पौधे बिना बीज के नए पौधे उत्पन्न करते हैं। यहाँ पाँच उदाहरण दिए गए हैं :
- पैसली : इसकी तने की कटिंग को पानी या मिट्टी में रखने पर जड़ें निकलती हैं और नया पौधा बनता है।
- आलू : आलू की ‘आँखों’ (बुड़) को लगाकर नया आलू पौधा उगाया जा सकता है।
- अदरक : अदरक की एक छोटी टुकड़ी. जिसमें बुड़ है, मिट्टी में लगाने पर नया पौधा विकसित होता है।
- गन्ना : गन्ने के तने की कटिंग को लगाकर नए गन्ने के पौधे उगाए जाते हैं, क्योंकि गन्ना बहुत कम बीज पैदा करता है।
- बाँस : बाँस के तने के हिस्सों को लगाकर नए बाँस के पौधे उगाए जा सकते हैं, जो कायिक प्रवर्धन पर निर्भर करते हैं।
Class 8 Science Chapter 13 Question Answer in Hindi (Intext)
खोजबीन और विचार करें (पृष्ठ 210)
आप क्या सोचते हैं यदि पृथ्वी पर जीवन ही नहीं होता तो वह कैसी दिखाई देती?
उत्तर :
यदि पृथ्वी पर जीवन नहीं होता. तो वह एक सुनसान और निर्जन ग्रह की तरह दिखाई देती। वहाँ न तो हरे-भरे पेड़ होते, न जीव-जंतु, और न ही जल के स्रोत। केव्रल सूखी और बंजर भूमि होती। यह एक नीरस और उदासीन दूरय होता।
पृथ्वी पर जीवन अरबों वर्षों से अस्तित्व में है। बड़े-बड़े परिवर्तनों एवं आपदाओं के उपरांत भी इसके यथावत बने रहने के क्या कारण हैं?
उत्तर :
पृथ्वी पर जीवन अरबों वर्षों से अस्तित्व में है क्योंकि यह कई अनुकूल परिस्थितियों का समर्थन करता है। पृथ्वी का वातावरण, जल, और जलवायु जीवन के लिए अनुकूल हैं। इसके अलावा, पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है, जिससे जीवन सुरक्षित रहता है।
कुत्ते अंडे क्यों नहीं देते एवं मुर्गियाँ जीवित चूजों को जन्म क्यों नहीं देतीं?
उत्तर :
कुत्ते अंडे नहीं देते, क्योंकि वे स्तनधारी जीव हैं। कुत्ते अपने बच्चों को माँ के शरीर के अंदर विकसित करते हैं और फिर जीवित पिल्लों को जन्म देते हैं। दूसरी ओर, मुर्गियाँ पक्षी हैं और उनके अंडे बाहर रखे जाते हैं, जहाँ चूजों का विकास होता है। इसलिए, मुर्गियाँ अंडों से चूजे देती हैं।
यदि कोई अंतरिक्षयान मंगल ग्रह पर अपने साथ मृदा एवं जल ले जाए तो क्या वहाँ पौधे उगाए जा सकते हैं?
उत्तर :
यदि कोई अंतरिक्षयान मंगल ग्रह पर मिट्टी और जल ले जाए, तो वहाँ पौधे उगाने की संभावना है। लेकिन मंगल की जलवायु और वातावरण पृथ्वी से बहुत अलग हैं, जिससे पौधों की वृद्धि में कठिनाई हो सकती है।
(पृष्ठ 212)
प्रश्न :
मुझे आश्चर्य होता है कि पृथ्वी में ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं जिनसे जीव-जंतु पनपते हैं और वे जीवित रह पाते हैं।
उत्तर :
पृथ्वी एक अद्वितीय ग्रह है जो जीवन के लिए विशेषताएँ प्रदान करता है। यहाँ कुछ मुख्य विशेषताएँ हैं :
- वायु : पृथ्वी पर ऑक्सीजन है, जो जानवरों के लिए आवश्यक है, और कार्बन डाइऑक्साइड, जो पौधों के लिए जरूरी है।
- जल : पानी जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- मौसम : पृथ्वी का तापमान न तो बहुत गर्म है और न ही बहुत ठंडा, जिससे जीवों के लिए अनुकूल वातावरण बनता है।
- सूर्य से दूरी : पृथ्वी, सूर्य से सही दूरी पर स्थित है, जिससे इसे सही मात्रा सें ऊर्जा मिलती है।
- संरक्षणात्मक वायुमंडल : पृथ्वी का वायुमंडल हानिकारक विकिरण को रोकता है।
- मिट्टी और धूप : पौधों के विकास के लिए उपयुक्त मिट्टी और ध्रूप उपलब्ध है।
- गुरुत्वाकर्षण : पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण सब कुछ सिश्रर रखता है।
(पृष्ठ 215)
क्या तापमान अथवा सूर्य से दूरी ही एकमात्र कारण है जो पृथ्वी को रहने योग्य बनाता है?”
उत्तर :
नहीं, केवल तापमान और सूर्य से दूरी ही नहीं, बल्कि पृथ्वी का आकार, वायुमंडल और उसके गैसों की परतें भी महत्वपूर्ण हैं। ये सभी मिलकर जीवन को बनाए रखने में मदद करते हैं।
क्या होता यदि पृथ्वी का आकार बहुत छोटा या बहुत बड़ा होता?
उत्तर :
यदि पृथ्वी का आकार बहुत छोटा होता, तो इसका गुरुत्वाकर्षण कमजोर होता और वायुमंडल की गैसें उड़ जातीं। यदि आकार बहुत बड़ा होता, तो गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत होता कि हम दबकर टूट सकते थे। इस तरह, पृथ्वी का सही आकार और स्थिति जीवन के लिए आवश्यक हैं।
(पृष्ठ 217)
प्रश्न :
क्या पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने में उसके चुंबकीय क्षेत्र की कोई भूमिका है?
उत्तर :
जी हाँ, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की जीवन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षेत्र हानिकारक कणों को पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रांकता है, जिससे हमारा वायुमंडल और जीवन सुरक्षित रहता है। इसके बिना, पराबैंगनी किरणें और अन्य हानिकारक तत्व जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रकार, पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
(पृष्ठ 221)
प्रश्न :
बाँस और गन्ना किस प्रकार नए पौधे बनाते हैं? मैंने कभी उनके बीज नहीं देखे।
उत्तर :
बाँस और गन्ना अलैंगिक जनन के द्वारा नए पौधे बनाते हैं। ये पौधे अपने तने या जड़ों से नए पौधों का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, जब बाँस का तना जमीन में रोपा जाता है, तो वह नए पौधों को जन्म देता है। गन्ना भी इसी तरह से बढ़ता है। गन्ने की कटिंग करके उसे मिट्टी में रोपने पर नए पौधे उगते हैं। इस प्रक्रिया को ‘कायिक प्रवर्धन’ कहते हैं, जिसमें पौधे के किसी भाग को रोपकर नए पौधे बनाए जाते हैं।
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