NCERT Class 8 Science (Curiosity Hindi Medium - जिज्ञासा) Solutions
Chapter 12: How Nature Works in Harmony (Hindi Medium)
Chapter-wise Curiosity Class 8 Solutions and Class 8 Science Chapter 12 Question Answer in Hindi Medium प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है are useful for focused study.
Class 8th Science Chapter 12 Question Answer in Hindi Medium
Science Class 8 Chapter 12 Question Answer in Hindi
NCERT Class 8 Science Chapter 12 Question Answer Hindi Medium
जिज्ञासा बनाए रखें (पृष्ठ 207-208)
विए गए आरेख (चित्र 12.19) को देखिए और गलत कथन का चयन कीजिए।
चित्र 12.19 समुदाय, समष्टि और पारितंत्र
(क) समुदाय समष्टि से बड़ा होता है।
(ख) समुदाय एक पारितंत्र से छोटा होता है।
(ग) पारितंत्र किसी समुदाय का भाग होता है।
उत्तर :
(ग) पारितंत्र किसी समुदाय का भाग होता है।

समष्टि किसी समुदाय का भाग होती है। यदि सभी अपघटक, अकस्मात एक वन पारितंत्र से लुप्त हो जाएँ तो आपके विचार से क्या परिवर्तन होंगे? व्याख्या कीजिए कि अपघटक आवश्यक क्यों होते हैं?
उत्तर :
अपघटक जैसे कवक और जीवाणु मृत जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं और पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस लाते हैं। यदि ये जीव लुप्त हो जाएँ, तो मृत पौधे और जानवरों का अपघटन नहीं होगा। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाएगी, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी। पौधों के बिना, उपभोक्ता जीव भी प्रभावित होंगे, जिससे पारितंत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा। इसलिए, अपघटक पारितंत्र के लिए बहुत आवश्यक हैं क्योंकि वे प्राकृतिक चक्र को बनाए रखते हैं और जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को पुनः प्राप्त करते हैं।
तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के सेल्वम ने बताया कि उनका गाँव मैंग्रोव वनों की उपस्थिति के कारण 2004 की सुनामी से आस-पास के गाँवों की तुलना में कम प्रभावित हुआ था। इससे सरिता, शबनम और शिजो को आश्चर्य हुआ। वे सोच रही थीं कि क्या मैंग्रोव वन गाँव की सुरक्षा कर रहे थे। क्या आप इसे समझने में उनकी सहायता कर सकते हैं?
उत्तर :
मैंग्रोव वन, जो कि समुद्र के किनारे पाए जाते हैं, प्राकृतिक आपदाओं जैसे चक्रवात और बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करते हैं। कुड्डालोर जिले के सेल्वम के गाँव में 2004 की सुनामी के दौरान मैंग्रोव वन ने आसपास के गाँवों को कम प्रभावित किया। मैंग्रोव के पेड़ समुद्र की लहरों को रोकते हैं और मिट्टी को स्थिर रखते हैं, जिससे बाढ़ के समय सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, ये पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं, जो पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है।
इस आहार शृंखला को देखें-
यदि इस पारितंत्र से मेंढक लुप्त हो जाएँ तो टिड्डों और साँपों की समष्टि पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्यों?
उत्तर :
जब मेंढक इस पारितंत्र से लुप्त हो जाते हैं, तो टिड्डों की संख्या बढ़ जाएगी क्योंकि मेंढक उन्हें खाते हैं। इससे टिड्डों की अधिकता से घास का नुकसान होगा। साँपों की संख्या भी कम हो सकती है, क्योंकि वे मेंढकों को खाते हैं। इस प्रकार, पारितंत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा।

एक विद्यालय के उद्यान में विद्यार्थियों ने पिछले मौसम में अपेक्षाकृत कम तितलियाँ देखी। इसके संभावित कारण क्या हो सकते हैं? परिसर में अधिक तितलियाँ लाने के लिए विद्यार्थी क्या कदम उठा सकते हैं?
उत्तर :
तितलियों की कमी के कुछ संभावित कारण हो सकते हैं:
- फूलों की कमी : यदि उद्यान में पर्याप्त फूल नहीं हैं, तो तितलियाँ भोजन के लिए नहीं आएँगी।
- कीटनाशकों का उपयोग : कीटनाशकों का प्रयोग तितलियों को नुकसान पहुँचाता है और उनकी संख्या को कम कर सकता है।
- कम धूप या पानी : तितलियों को गर्म और सुरक्षित स्थान चाहिए, यदि उद्यान में ये नहीं हैं तो वे नहीं आएँगी।
विद्यार्थी निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं :
- अधिक फूल लगाएँ : मीठे रस वाले फूलों को लगाकर तितलियों को आकर्षित किया जा सकता है।
- हानिकारक रसायनों से बचें : कीटनाशकों का उपयोग न करें, इससे तितलियों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
- सूरज की रोशनी वाले स्थान बनाएँ : उद्यान में ऐसे स्थान बनाएँ जहाँ तितलियाँ धूप में बैठ सकें और सुरक्षित महसूस करें।
ऐसा पारितंत्र क्यों संभव नहीं है जिसमें केवल उत्पादक हों और कोई उपभोक्ता या अपघटक न हों?
उत्तर :
एक ऐसा पारितंत्र जिसमें केवल उत्पादक (जैसे पौधे) हों और कोई उपभोक्ता या अपघटक (जैसे जानवर या बैक्टीरिया) न हों, संभव नहीं है। क्योंकि उत्पादक अकेले ऊर्जा का उत्पादन करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी ऊर्जा को बनाए रखने के लिए उपभोक्ताओं की आवश्यकता होती है। उपभोक्ता उत्पादकों से ऊर्जा लेते हैं और अपघटक मृत जीवों को तोड़कर पोषक तत्वों को पुनः चक्रित करते हैं। इस प्रकार, सभी घटक एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं, जिससे पारितंत्र का संतुलन बना रहता है।
अपने घर या विद्यालय के समीप दो अलग-अलग स्थानों का अवलोकन कीजिए (जैसे एक उद्यान और सड़क के किनारे का कोई स्थल)। आपको दिखाई देने वाले सजीव एवं निर्जीव घटकों की सूची बनाइए। दोनों पारितंत्र किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर :
हम एक उद्यान और सड़क के किनारे का अवलोकन करेंगे।
घटक | उद्यान (पार्क) | सड़क के किनारे (रोडसाइड) |
सजीव | पेड़, पक्षी, गिलहरी, कीड़े, घास | कुछ पौधे (जंगली घास), आवारा जानवर, कीड़े |
निर्जीव | मिट्टी, पानी, धूप, बेंच | धूल, सीमेंट, शोर |
भिन्नता
(i) पार्क में एक व्यवस्थित पारिस्थितिकी तंत्र होता है जिसमें विविध पौधे और जानवर होते हैं। यहाँ जीवन का संतुलन और जैव विविधता अधिक होती है।
(ii) सड़क के किनारे एक विकृत, मानव-परिवर्तित क्षेत्र होता है, जहाँ प्रजातियाँ कम होती हैं और प्रदूषण अधिक होता है। यहाँ जैव विविधता कम होती है।
कृषि क्षेत्र जैसे मानव निर्मित पारितंत्र आवश्यक हैं परंतु उन्हें संधारणीय बनाया जाना चाहिए। इस कथन पर टिप्पणी करें।
उत्तर :
कृषि क्षेत्र मानव निर्मित पारितंत्र है, जो हमें भोजन प्रदान करता है। लेकिन यदि हम रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग करते हैं, तो यह प्रकृति को नुकसान पहुँचाता है। इसलिए, हमें स्थायी कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए, जैसे जैविक खेती और फसल चक्र। ये तरीके मिट्टी, पानी और जैव विविधता की रक्षा करते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित होता है।
यदि किसी रोग के कारण भारतीय शशकों की समष्टि कम हो जाती है (चित्र 12.20) तो इसका अन्य जीवों की संख्या पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :

- शिकारी जीव : जैसे लोमड़ियाँ और उकाब, इनकी संख्या में कमी आएगी, क्योंकि इनके भोजन (शशक) की कमी हो जाएगी। इससे इन शिकारी जीवों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ेगा।
- पौधे : शशकों की कमी से घास और अन्य पौधों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि शशक उन्हें चाटते हैं। लेकिन अगर पौधे बहुत अधिक बढ़ जाएँ, तो यह पर्यावरण को बदल सकते हैं।
- हिरण : चूँकि हिरणों पर लोमड़ियों या उकाबों का शिकार नहीं होता, इसलिए उनकी संख्या पर सीधे प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन वे खाद्य शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- खाद्य जाल : शशक जैसे महत्वपूर्ण शाकाहारी जीवों की कमी से खाद्य जाल में असंतुलन उत्पन्न होता है, जिससे उच्च (शिकारी) और निम्न (पौधे) स्तर पर प्रभाव पड़ता है।
Class 8 Science Chapter 12 Question Answer in Hindi (Intext)
खोजबीन और विचार करें (पृष्ठ 191)
वन क्षेत्रों का क्षरण और वर्षा के प्रतिरूपों में परिवर्तन खेतों और गाँवों में हाथियों के प्रवेश का कारण कैसे बन सकता है?
उत्तर :
जब वन क्षेत्र कम होते हैं और वर्षा में परिवर्तन होता है, तो हाथियों को उनके प्राकृतिक भोजन और पानी के स्रोतों की कमी होती है। इससे हाथी खेतों और गाँवों में प्रवेश करते हैं, क्योंकि वे भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में होते हैं।
कल्पना कीजिए कि आप सघन वन का एक वृक्ष हैं। जल, सूर्य का प्रकाश, अन्य जंतुओं तथा वन के अन्य घटकों के साथ आपके संबंध किस प्रकार के होंगे?
उत्तर :
जब हम सघन वन के एक वृक्ष के रूप में कल्पना करते हैं, तो जल, सूर्य का प्रकाश और अन्य जीव-जंतु हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जल हमें जीवन के लिए आवश्यक नमी प्रदान करता है, जिससे हम अपने पत्तों और तनों के माध्यम से पोषण प्राप्त कर सकते हैं। सूर्य का प्रकाश हमें ऊर्जा देता है, जिससे हम प्रकाश संश्लेषण करके अपना भोजन बनाते हैं।
क्या आपको लगता है कि पृथ्वी मनुष्यों के बिना फल-फूल सकती है? क्या मनुष्य पृथ्वी के बिना जीवित रह सकते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी पर मनुष्य के बिना भी जीवन संभव है। प्रकृति में पौधे, जानवर, और अन्य जीव-जंतु बिना मानव के भी फल-फूल सकते हैं। लेकिन मनुष्य पृथ्वी के लिए कई बदलाव लाते हैं, जैसे कि कृषि और संरक्षण। मनुष्य पृथ्वी के बिना नहीं रह सकते क्योंकि हम प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। जल, हवा, और भोजन जैसे आवश्यक चीजें हमें प्रकृति से मिलती हैं।
यदि दो प्रकार के पक्षी एक ही फल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं तो समय के साथ उनके जीवन जीने की शैली में क्या परिवर्तन आ सकता है?
उत्तर :
जब दो प्रकार के पक्षी एक ही फल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो पक्षी अपने खाने का समय या स्थान बदल सकते हैं ताकि वे एक-दूसरे से टकराएँ नहीं। एक प्रजाति यह भी सीख सकती है कि वे अलग-अलग फल खा सकती हैं। इससे उन्हें प्रतिस्पर्धा से बचने में मदद मिलती है और वे अपने आहार को विविधता प्रदान कर सकते हैं।
क्या मानवीय क्रियाकलाप प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकते हैं?
उत्तर :
हाँ, मानवीय क्रियाकलाप प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकते हैं। जैसे, वनों की कटाई, औद्योगिक प्रदूषण, और जलवायु परिवर्तन। ये क्रियाएँ पर्यावरण को प्रभावित करती हैं, जिससे बाढ़, सूखा और भूकंप जैसी आपदाएँ हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, जब हम अधिक पेड़ काटते हैं, तो मिट्टी का कटाव बढ़ता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह, जलवायु परिवर्तन से मौसम में बदलाव आते हैं, जो प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ाते हैं।
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