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NCERT Solutions for Class 8 science hindi Chapter 11: Keeping Time with the Skies (Hindi Medium)

16 Solved Questions & Exercises10 min estimated readingUpdated 2026-09-16
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NCERT Class 8 Science (Curiosity Hindi Medium - जिज्ञासा) Solutions
Chapter 11: Keeping Time with the Skies (Hindi Medium)

Chapter-wise Curiosity Class 8 Solutions and Class 8 Science Chapter 11 Question Answer in Hindi Medium आकाशीय परिघटनाएँ और काल निर्धारण are useful for focused study.

Class 8th Science Chapter 11 Question Answer in Hindi Medium

Science Class 8 Chapter 11 Question Answer in Hindi

NCERT Class 8 Science Chapter 11 Question Answer Hindi Medium

जिज्ञासा बनाए रखें (पृष्ठ 187-188)

प्रश्न 1


बताइए कि नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य-
(i) हम चद्रमा के केवल उस भाग को देख पाते हैं जो सूर्य के प्रकाश को हमारी ओर परावर्तित करता है।
उत्तर : सत्य

(ii) पृथ्वी की छाया सूर्य के प्रकाश को चद्रंमा तक नहीं पहुँचने देती और चद्रंमा की कलाओं का कारण बनती है।
उत्तर : असत्य

(iii) कालदर्शक विभिन्न खगोलीय चक्रों पर आधारित होते हैं, जो निश्चित क्रम में बारंबार घटित होते हैं।
उत्तर : सत्य

(iii) चंद्रमा को केवल रात्रि के समय ही देखा जा सकता है।
उत्तर : असत्य

प्रश्न 2


अमोल का जन्म 6 मई को पूर्णिमा के दिन हुआ था। क्या उसका जन्मदिन प्रतिवर्ष पूर्णिमा के दिन ही होता है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
अमोल का जन्म 6 मई को पूर्णिमा के दिन हुआ था, लेकिन हर साल उसका जन्मदिन पूर्णिमा के दिन नहीं आता। इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कलाएँ लगभग 29.5 दिनों में बदलती हैं, जबकि एक वर्ष में 365 दिन होते हैं। इसलिए. हर साल पूर्णिमा का दिन अलग-अलग तारीखों पर आता है।

प्रश्न 3


ऐसी दो बातें बताइए जो चित्र 11.10 में सही नहीं दर्शाई गई हैं।

उत्तर :
चित्र 11.10 में सही नहीं दर्शाई गई दो बातें निम्नलिखित हैं-

Keeping Time with the Skies (Hindi Medium) Diagram 1

  • चाँद पर तारे: चित्र में चाँद के अँधेरे हिस्से में तारे दिखाई दे रहे हैं, जो गलत हैं। चाँद एक ठोस वस्तु है, जो दूर के तारों की रोशनी को रोकता है।
  • चाँद के पीछे बादल: चित्र में चाँद के पीछे बादल दिखाए गए हैं, लेकिन बादल केवल पृथ्वी के वायुमंडल में होते हैं। इसलिए, वे हमेशा चाँद के सामने ही दिखाई देते हैं।
प्रश्न 4


चित्र 11.11 में दर्शाई गई चद्रमा की कलाओं के चित्रों को देखिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(i) उपर्युक्त चित्र में दर्शाई गई चद्रमा की कलाओं के संगत सही नामाक्षर लिखिए।

उत्तर :

Keeping Time with the Skies (Hindi Medium) Diagram 2

Keeping Time with the Skies (Hindi Medium) Diagram 3

चित्र का नामाक्षर

चंद्रमा की कलाएँ

अमावस्या के तीन दिन पश्चात

पूर्णिमा

पूर्णिमा के तीन दिन पश्चात

पूर्णिमा के एक सप्ताह पश्चात

अमावस्या के दिन

(ii) चित्र में दर्शाई गई चद्रंमा की उन कलाओं के नामाक्षर लिखिए जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देती। (संकेतसंदर्भ के लिए आप क्रियाकलाप 11.1 के अपने अवलोकनों अथवा चित्र 11.2 का उपयोग कर सकते हैं।)
उत्तर :
चित्र थ (नवचंद्र अवस्था) पृथ्वी से कभी नहीं देखा जाता क्योंकि चंद्रमा का रोशन हिस्सा हमारी ओर नहीं है।

प्रश्न 5


मालिनी ने सूर्यास्त के समय चंद्रमा को ठीक अपने सिर के ऊपर देखा-
(i) मालिनी द्वारा प्रेक्षित चंद्रमा की कला का चित्र बनाइए।
(ii) क्या यह चंद्रमा का वर्धमान काल है या क्षीयमाण काल है?
उत्तर :
(i) जब चंद्रमा सूर्यास्त के समय सिर के ऊपर होता है, तो यह आमतौर पर चंद्रमा का वर्धमान काल होता है। इस स्थिति में, चंद्रमा का दाहिना भाग उज्ज्वल होता है और बायाँ भाग अँधरा होता है। इसलिए, हमें एक आधा चंद्रमा (दाहिना भाग चमकीला और बायाँ भाग अँधेरा) बनाना चाहिए।

(ii) यह चंद्रमा का वर्धमान काल है। वर्धमान काल वह समय होता है, जब चंद्रमा का उज्ज्वल भाग बढ़ रहा होता है और यह नए चंद्रमा के बाद होता है।

Keeping Time with the Skies (Hindi Medium) Diagram 4

प्रश्न 6


रवि ने कहा, “मैंने एक बालचंद्र देखा और जब सूर्यास्त हो रहा था तो यह पूर्व में उदित हो रहा था।” कौशल्या ने कहा, “एक बार मैंने दोपहर के समय पूर्व दिशा में अर्धाधिक चंद्र देखा था।” दोनों में से किसकी बात सत्य है?
उत्तर :
रवि और कौशल्या की बातों में से कौशल्या की बात सही है। चंद्रमा हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में होता है। जब सूर्य अस्त होता है, तब चंद्रमा पूरब में उगता है। इसलिए, रवि का कहना गलत है।
चंद्रमा की कलाएँ और उसकी स्थिति सूर्य के साथ उसके संबंध पर निर्भर करती हैं। जब चंद्रमा का चमकीला भाग घटता है, तो वह सूर्य के समीप आता है, जिससे उसे दिन में देख़ना संभव होता है।

प्रश्न 7


वैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी से दूर हट रहा है और इसकी परिक्रमण गति कम हो रही है।
इससे चंद्र-सौर कालदर्शक में प्रायः अंतर्वेशी मास बढ़ाने की आवश्यकता होगी या घटाने की आवश्यकता होगी।
उत्तर :
चंद्रमा पृथ्वी से दूर जा रहा है और इसकी गति कम हो रही है। इससे चंद्र-सौर कालदर्शक में चंद्र महीनों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता होगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि चंद्रमा की गति धीमी होने से उसके चक्र में बदलाव आएगा, जिससे अधिक महीनों की गणना करनी पड़ेगी।

प्रश्न 8


किसी सौर कालदर्शक में 3 वर्ष की अवधि में कुल 37 पूर्णिमाएँ आती हैं। दर्शाइए कि इन 37 पूर्णिमाओं में से कम-से-कम दो पूर्णिमाएँ सौर कालदर्शक के एक ही महीने में आएँगी।
उत्तर :
सौर कालदर्शक में 3 वर्षों में कुल 37 पूर्णिमा आती हैं। एक सौर वर्ष में 12 महीने होते हैं, तो 3 वर्षों में 36 महीने होते हैं।
जब 37 पूर्णिमाओं को 36 महीनों में रखा जाता है, तो कम-से-कम एक महीने में दो पूर्णिमाएँ आनी चाहिए।
37 – 36 = 1 महीना
इसलिए, ये 37 पूर्णिमाओं में से कम-से-कम दो पूर्णिमाएँ एक ही महीने में आएँगी। इसे हम ‘ब्लू मून’ भी कहते हैं, जब एक महीने में दो पूर्णिमाएँ होती हैं।

प्रश्न 9


किसी विशेष रात्रि में वैशाली ने आकाश में चंद्रमा का सूर्यास्त से सूर्योदय तक अवलोकन किया। उसने चंद्रमा की किस कला का अवलोकन किया होगा?
उत्तर :
अगर वैशाली ने किसी विशेष रात में सूर्यास्त से लेकर सूर्योंदय तक चंद्रमा का अवलोकन किया, तो उसने पूर्ण चंद्रमा का अवलोकन किया होगा।

प्रश्न 10


यदि हम अधिवर्षों (लीप वर्ष) को गणना में लेना बंद कर दें तो लगभग कितने वर्षों के पश्चात भारत का स्वतंत्रता दिवस शीत ऋतु में पड़ेगा?
उत्तर :
यदि हम अधिवर्षों (लीप वर्ष) को गणना में लेना बंद कर दें, तो हमारे कैलेंडर में हर 4 वर्षों में लगभग 1 दिन का अंतर आएगा। इसका मतलब है कि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को शीत ॠतु में लाने के लिए लगभग 180 दिनों का अंतर चाहिए होगा।
180 दिन × 4 वर्ष = 720 वर्ष।
लगभग 720 वर्षों के बाद भारत का स्वतंत्रता दिवस शीत ॠतु में पड़ेगा।

प्रश्न 11


कृत्रिम उपग्रहों के प्रमोचन का उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर :
कृत्रिम उपग्रहों के प्रमोचन का उद्देश्य विभिन्न कार्यों में सहायता करना है। इनमें संचार, मौसम की जानकारी, आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान शामिल हैं। इसरो इन उपग्रहों को विकसित करके इन कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाता है।

प्रश्न 12


समय के निम्नलिखित माप किन आवर्ती परिघटनाओं पर आधारित हैं- (i) दिवस, (ii) मास, (iii) वर्ष
उत्तर :
समय के अग्रालिखित माप आवर्ती परिघटनाओं पर आधारित होते हैं:
(i) दिन (Day) : यह पृथ्वी के अपने ध्रुव पर घूमने की प्रक्रिया से निर्धारित होता है, जो लगभग 24 घंटे में पूरा होता है।
(ii) मास (Month) : यह चंद्रमा की परिक्रमा और उसकी कलाओं के आधार पर होता है, जो लगभग 29.5 दिनों में पूरा होता है।
(iii) वर्ष (Year) : यह पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने की प्रक्रिया से निर्धारित होता है, जो लगभग 365.25 दिनों में पूरा होता है।

Class 8 Science Chapter 11 Question Answer in Hindi (Intext)

खोजबीन और विचार करें (पृष्ठ 171)

प्रश्न 1


क्या आपने कभी दिन के समय चाँद देखा है? आपके विचार से यह कभी-कभी सूर्य के क्षितिज पर विद्यमान होने पर भी क्यों दिखाई देता है?
उत्तर :
हाँ, मैंने दिन के समय चाँद देखा है। चाँद को दिन में देखना इसलिए संभव है क्योंकि वह सूरज की रोशनी को परावर्तित करता है। जब चाँद का आकार सही होता है, तो वह सूरज के प्रकाश के बावजूद चमकता है।

प्रश्न 2


मान लीजिए कि आप पृथ्वी पर नहीं चाँद पर रहते हैं तब आपके लिए एक दिन, एक माह अथवा एक वर्ष से क्या अभिप्राय होगा?
उत्तर :

  • अगर आप चाँद पर रहते हैं, तो एक दिन का मतलब होगा-जब चाँद अपनी धुरी पर एक बार घूमता है, जो लगभग 29.5 पृथ्वी दिनों के बराबर है।
  • एक माह का मतलब होगा चाँद की कलाएँ, जो 29.5 दिनों में पूरी होती हैं।
  • एक वर्ष का मतलब होगा चाँद का पृथ्वी के चारों ओर एक चक्कर लगाना, जो लगभग 365 पृथ्वी दिनों के बराबर होगा।
प्रश्न 3


क्या होता यदि पृथ्वी के दो चंद्रमा होते? इससे रात्रि आकाश का दृश्य कैसे परिवर्तित हो जाता?
उत्तर :
यदि पृथ्वी के दो चंद्रमा होते, तो रात का आकाश बहुत अलग होता। एक चंद्रमा की जगह दो चंद्रमा होने से चाँद की रोशनी अधिक होती, जिससे रात में अधिक उजाला होता।

प्रश्न 4


यदि हमारे पास घड़ियाँ अथवा कालदर्शक (कैलेंडर) नहीं होते तो हम समय का मापन कैसे करते?
उत्तर :
यदि हमारे पास घड़ियाँ या कैलेंडर नहीं होते, तो हम समय का मापन प्राकृतिक संकेतों से करते। जैसे सूरज की रोशनी, चाँद की कलाएँ, और ऋतुओं का परिवर्तन। इनसे हम दिन, रात और महीनों का अनुमान

लगा सकते थे। (पृष्ठ 174)

प्रश्न :
जब चंद्रमा सूर्य के समीप दिखाई देता है तो इसका पृथ्वी से दर्शनीय दीप्त भाग घट क्यों जाता है?
उत्तर :
जब चंद्रमा सूर्य के करीब होता है, तो हम उसके दीप्तिमान भाग को कम देखते हैं। इसका कारण यह है कि सूर्य की रोशनी चंद्रमा के उस हिस्से पर पड़ती है जो पृथ्वी से दूर है। इसलिए, हमें चंद्रमा का उज्ज्वल हिस्सा छोटा दिखाई देता है।

(पृष्ठ 183)

प्रश्न :
अधिकांश भारतीय पर्व प्रत्येक वर्ष भिन्न-भिन्न दिनाँक पर क्यों पड़ते हैं?
उत्तर :
भारतीय पर्व हर वर्ष भिन्न-भिन्न दिनाँक पर पड़ते हैं, क्योंकि ये चंद्र-सौर कालदर्शक पर आधारित होते हैं। चंद्रमा की कलाओं के अनुसार पर्व मनाने के लिए चंद्र और सौर वर्ष के बीच का अंतर हर कुछ वर्षों में अधिक मास जोड़कर संतुलित किया जाता है।
इसलिए, ग्रेगोरीय कैलेंडर के अनुसार ये पर्व अलग-अलग महीनों में आ सकते हैं, लेकिन आमतौर पर उनका अंतर एक महीने से कम होता है।

(पृष्ठ 185)

प्रश्न :
संध्या होते ही जब मैं रात्रि-आकाश पर दृष्टिपात करती हूँ तो मै कुछ तारों को गति करते हुए देखती हूँ। ये क्या हैं? क्या इनकी गति भी आवर्ती है?
उत्तर :
जब आप रात के आकाश में गति करते हुए तारों को देखते हैं, तो वे वास्तव में उपग्रह या कभी-कभी ग्रह होते हैं। ये उपग्रह सूर्य की रोशनी को परावर्तित करते हैं और आकाश में एक निश्चित रास्ते पर चलते हैं।

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