NCERT Class 8 Science (Curiosity Hindi Medium - जिज्ञासा) Solutions
Chapter 4: Electricity Magnetic and Heating Effects (Hindi Medium)
Chapter-wise Curiosity Class 8 Solutions and Class 8 Science Chapter 4 Question Answer in Hindi Medium विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव are useful for focused study.
Class 8th Science Chapter 4 Question Answer in Hindi Medium
Science Class 8 Chapter 4 Question Answer in Hindi
NCERT Class 8 Science Chapter 4 Question Answer Hindi Medium
जिज्ञासा बनाए रखें (पृष्ठ 58-60)
रिक्त स्थान भरिए
(i) वोल्टीय सेल में प्रयकुत होने वाला विलयन कहलाता है।
(ii) एक धारावाही कुंडली – की भाँति व्यवहार करती है।
उत्तर :
(i) विद्युत अपघट्य
(ii) विद्युत-चुंबक।
सही विकल्प चुनिए
(i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है। (सत्य/असस्य)
उत्तर : असत्य
(ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। (सत्य/असत्य)
उत्तर : सत्य
(iii) एक सेल के उपयोग से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी के उपयोग से बने उसी विद्युत-चुंबक की अपेक्षा लोहे के अधिक कागज-क्लिपों को आकर्षित करता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर : असत्य
किसी निक्रोम के तार में अल्प समय के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
(i) तार गरम हो जाता है।
(ii) तार के नीचे रखे चुंबकीय दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है।
सही विकल्प का चयन कीजिए
(क) केवल विकल्प (i) सही है।
(ख) केवल विकल्प (ii) सही है।
(ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
(घ) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही नही हैं।
उत्तर :
(ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
स्तंभ ‘क’ में दिए गए एकांशों का मिलान स्तंभ ‘ख’ में दिए गए एकांशों से कीजिए।
उत्तर :

स्तंथ ‘क’ | स्तंभ ‘ख’ |
(i) वोल्टीय सेल | (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है। |
(ii) विद्युत इस्तरी | (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है। |
(iii) निक्रोम तार | (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त |
(iv) विद्युत-चुंबक | (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय |
सामान्यत: विद्युत तापन युक्तियों में निक्रोम तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह-
(i) विद्युत का सुचालक है।
(ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
(iii) ताँबे की अपेक्षा सस्ता है।
(iv) विद्युत का कुचालक है।
उत्तर :
(ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
विद्युत-तापन युक्तियों (जैसे- विद्युत कक्ष-तापक अथवा विद्युत हीटर) को प्रायः पारंपरिक तापन विधियों (जैसे- लकड़ी अथवा चारकोल जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता है। समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कथन के समर्थन हेतु कारण बताइए।
उत्तर :
इसके कई कारण हैं:
- त्वरित ताप : विद्युत उपकरण तुरंत गर्मी प्रदान करते हैं, जिससे हमें तुरंत आराम मिलता है।
- नियंत्रण : इन उपकरणों में तापमान को नियंत्रित करना आसान होता है।
- स्वास्थ्य और पर्यावरण : ये उपकरण प्रदूषण नहीं फैलाते और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालते, जैसे कि श्वसन संबंधी समस्याएँ।
- ईंधन की आवश्यकता नहीं : विद्युत उपकरणों का उपयोग करने से हमें ईंधन इकट्ठा करने की आवश्यकता नहीं होती।
चित्र 4.4 (क) का अवलोकन कीजिए। यदि इसमें कुंडली के समीप रखे दिक्सूचक की सुई में विक्षेपण होता है तो-
(i) विद्युत धारा का पथ दर्शाने हेतु आरेख पर तीर का चिह्न लगाइए।
उत्तर :
जब बैटरी के सकारात्मक टर्मिनल से धारा प्रवाहित होती है, तो यह कुंडली के ‘अ’ छोर से शुरू होती है, फिर कुंडली के ‘आ’ छोर तक जाती है, और अंत में बैटरी के नकारात्मक टर्मिनल तक पहुँचती है। आरेख में तीर इस दिशा को दर्शाएगा।


(ii) स्पष्ट कीजिए कि कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है?
उत्तर :
जब कुंडली में विद्युत धारा बहती है, तो यह एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुंबकीय क्षेत्र दिक्सूचक की अपनी चुंबकीय शक्ति के साथ क्रिया करता है, जिससे दिक्सूचक घुमती है।
(iii) यदि आप बैटरी के सिरों को उल्टा कर देते हैं तो पूर्वानुमान लगाइए कि विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
यदि बैटरी के सिरों को उल्टा किया जाता है, तो कुंडली के चुंबक के ध्रुव बदल जाते हैं। इससे दिक्सूचक की दिशा भी बदल जाएगी और यह विपरीत दिशा में घुमेगी।
मान लीजिए कि अध्याय के आरंभ में उल्लिखित कहानी में सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक प्रदर्श के स्विच को ऑफ करना भूल जाती है। कुछ समय पश्चात लोहे की कील लोहे से बनी कागज-क्लिपों को नहीं उठा पाती है परंतु लोहे की कील के चारों ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उत्थापक विद्युत-चुंबक ने क्लिपों को उठाना क्यों बंद कर दिया? संभावित कारण बताइए।
उत्तर :
जब सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक का स्विच ऑफ करना भूल जाती है, तो बैटरी का चार्ज खत्म हो जाता है। इससे विद्युत धारा का प्रवाह रुक जाता है। जब विद्युत धारा नहीं बहती, तो लोहा की कील का चुंबकीय प्रभाव खत्म हो जाता है, इसलिए वह कागज की क्लिपों को नहीं उठा पाती।
हालाँकि, तार गर्म रहता है क्योंकि विद्युत धारा के प्रवाह के दौरान तार में गर्मी उत्पन्न होती है। जब धारा रुकती है, तो तार धीरे-धीरे सामान्य तापमान पर लौटता है। इसलिए, तार गर्म रहता है, लेकिन चुंबकीय प्रभाव समाप्त हो जाता है।
चित्र 4.12 (क) और (ख) में से किस चित्र में स्विच बंद (ऑफ) होने पर एल.ई.डी. दीप्त होगी?
उत्तर :
चित्र 4.12 (क) में स्विच बंद (ऑफ) होने पर एल.ई.डी. दीप्त होगी। इसमें नींबू का रस विद्युत अपघट्य के रूप में काम करता है। जबकि चित्र 4.12 (ख) में शुद्ध जल का उपयोग किया गया है, जो विद्युत अपघट्य नहीं बनता, इसलिए एल.ई.डी. नहीं जलेगी।

नेहा ठीक वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रियाकलाप 4.4 में ली गई थी किंतु वह इसके भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है जिससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी? यदि हाँ, तो क्या विक्षेपण पहले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?
उत्तर :
नेहा द्वारा किए गए क्रियाकलाप में, यदि कुंडली के भीतर से लोहे की कील निकाल दी जाती है, तो कुंडली अभी भी एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकती है।
चूँकि लोहे की कील चुंबकीय गुणधर्म रखती है, उसे निकालने से कुंडली की चुंबकीय शक्ति कम हो जाएगी। इसलिए, कुंडली द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव पहले की तुलना में कम होगा।
चित्र 4.13 में दर्शाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम एवं निक्रोम की बनी एक जैसी अकृति और आकार की चार कुंडलियाँ है।
जब कुंडलियों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडलियों के समीप रखी दिक्सूचक सुइयाँ विक्षेप दर्शाएँगी-
(i) केवल परिपथ (क) में
(ii) केवल परिपथ (क) और (ख) में
(iii) केवल परिपथ (क), (ख) और (ग) में
(iv) सभी चारों परिपथों में
उत्तर :
(iv) सभी चारों परिपथों में
सभी कुंडलियों में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर दिक्सूचक में विक्षेप होगा, लेकिन विक्षेप की मात्रा भिन्न होगी। लोहे की कुंडली सबसे अधिक विक्षेप दिखाएगी, जबकि निक्रोम सबसे कम।

Class 8 Science Chapter 4 Question Answer in Hindi (Intext)
खोजबीन और विचार करें (पृष्ठ 46)
विद्युत सेल से विद्युत-परिपथ बनाते समय यदि हमारे पास विद्युत लैंप नहीं है तो क्या हमारे पास कोई अन्य विधि है जिसके द्वारा हम पता लगा सकते हैं कि उस परिपथ में धारा प्रवाहित हो रही है या नहीं?
उत्तर :
हम एक सरल विधि का उपयोग कर सकते हैं। हम एक विद्युत चुंबक (जैसे कि एक कील जो लोहा है) का उपयोग कर सकते हैं। जब हम इसे परिपथ से जोड़ते हैं और धारा प्रवाहित होती है, तो यह चुंबक बन जाएगा और लोहे की वस्तुओं को आकर्षित करेगा। यदि कील लोहे की वस्तुओं को खींचती है, तो इसका मतलब है कि परिपथ में धारा प्रवाहित हो रही है।
क्या अस्थायी चुंबक बनाना संभव है? इन्हें कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर :
अस्थायी चुंबक बनाना संभव है। इसे एक लोहे की कील पर विद्युत तार लपेटकर और उसे विद्युत सेल से जोड़कर बनाया जा सकता है। जब धारा प्रवाहित होती है, तो कील चुंबक बन जाती है। जब धारा बंद की जाती है, तो कील का चुंबकीय प्रभाव खत्म हो जाता है।
हम जीवाश्म ईंधन एवं लकड़ी को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं परंतु विभिन्न प्रकार के विद्युत उपकरणों में ऊष्मा कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर :
विद्युत उपकरणों में ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए विद्युत धारा का उपयोग किया जाता है। जब विद्युत धारा किसी चालक तार से गुजरती है, तो वह तार गर्म हो जाता है, जिसे तापन अवयव कहते हैं। उदाहरण के लिए, विद्युत कक्ष-तापक. हीटर. और इस्तरी में यह तापीय प्रभाव काम करता है, जिससे ये उपकरण गर्म होते हैं और ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
हम कैसे ज्ञात कर सकते हैं कि कोई सेल अथवा बैटरी अब कार्य के योग्य नहीं रह गई है? क्या सभी प्रकार के सेलों अथवा बैटरियों को पुनः आवेशित करके कार्य के योग्य बनाया जा सकता है?
उत्तर :
जब कोई सेल या बैटरी अब कार्य के योग्य नहीं रहती, तो हम इसे निम्नलिखित तरीकों से जान सकते हैं :
विद्युत धारा का प्रवाह : यदि सेल से विद्युत धारा प्रंवाहित नहीं हो रही है, तो यह निष्क्रिय हो गई है।
रासायनिक अभिक्रिया : सेल के अंदर रासायनिक अभिक्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं, जिससे यह कार्य नहीं कर पाती।
सभी प्रकार के सेल और बैटरियों को पुन: आवेशित नहीं किया जा सकता। जैसे-शुष्क सेल एक बार उपयोग में लाने के लिए होते हैं और इन्हें पुन: चार्ज नहीं किया जा सकता। लेकिन, पुन: आवेशनीय बैटरियाँ, जैसे लिथियम-आयन बैटरियाँ, को कई बार चार्ज किया जा सकता है।
(पृष्ठ 49)
प्रश्न :
क्या हम विद्युत धारा का उपयोग चुंबक बनाने में कर सकते हैं?
उत्तर :
हाँ, हम विद्युत धारा का उपयोग चुंबक बनाने में कर सकते हैं। जब हम किसी तार में विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं, तो वह चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। इस चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग चुंबक बनाने के लिए किया जा सकता है।
(पृष्ठ 50)
प्रश्न :
क्या विद्युत चुंबक में छड़ चुंबक की भाँति दो ध्रुव होते हैं?
उत्तर :
हाँ।
(पृष्ठ 52)
क्या वास्तविक जीवन में भी वस्तुओं को उठाने के लिए विद्युत-चुंबकों का उपयोग किया जाता है?
उत्तर :
हाँ, वास्तविक जीवन में भी वस्तुओं को उठाने के लिए विद्युत-चुंबक का उपयोग किया जाता है। जैसे कि कारखानों में भारी धातुओं को उठाने और स्थानांतरित करने के लिए विद्युत-चुंबक का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रक्रिया बहुत प्रभावी और सुरक्षित होती है।
विद्युत-चुंबक के लिए क्रियाकलाप करते समय क्या आपने यह भी अवलोकन किया कि तार के सिरे गरम हो गए थे? ऐसा क्यों होता है?
उत्तर :
जब आप निक्रोम के तार से धारा प्रवाहित करते हैं, तो तार के सिरे गरम हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तार में प्रतिरोध होता है। जब विद्युत धारा तार से गुजरती है, तो यह प्रतिरोध के कारण ऊर्जा को गर्मी में बदल देती है। इस प्रक्रिया को हम ‘विद्युत धारा का तापीय प्रभाव’ कहते हैं।
(पृष्ठ 55)
प्रश्न :
सेलों एवं बैटरियों के भीतर वह क्या है जो विद्युत उत्पन्न करता है?
उत्तर :
सेलों और बैटरियों के भीतर रासायनिक पदार्थ होते हैं, जो विद्युत उत्पन्न करते हैं। जब धातुओं की छड़ें और विद्युत अपघट्य (जैसे अम्ल या लवण का विलयन) मिलते हैं, तो रासायनिक अभिक्रिया होती है, जिससे विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
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